कोरोना के डर से मरीज नहीं जा रहे जिला अस्पताल में, कम हो रही है ओपीडी में संख्या
कोरोना के डर से मरीज नहीं जा रहे जिला अस्पताल में, कम हो रही है ओपीडी में संख्या
मध्य-प्रदेश

कोरोना के डर से मरीज नहीं जा रहे जिला अस्पताल में, कम हो रही है ओपीडी में संख्या

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गुना 10 सितंबर (हि.स.)। कोरोना संक्रमण के प्रभाव से अब तक कोई भी सेक्टर अछूता नहीं रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित स्वास्थ्य महकमा हुआ है। एक तरफ जहां कोरोना संदिग्ध व संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ी है, वहीं अन्य बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार घटती जा रही है। इसकी मुख्य वजह है कोरोना का डर, जिसके संक्रमण से बचाव को लेकर अधिकांश लोग जिला अस्पताल जाना ही नहीं चाहते हैं। इस मानसिकता को बनाने में शासन-प्रशासन के उन दिशा निर्देशों ने भी काम किया है, जिसमें कहा गया था कि सामान्य बीमारी व अति आवश्यक न होने पर लोग अस्पताल जाने से बचें। यही कारण रहा कि मार्च से अब तक ओपीडी व आईपीडी की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। जानकारी के मुताबिक मार्च माह से पहले तक जिला अस्पताल में एक दिन की ओपीडी 1500 से अधिक थी, जो कोरोना काल में घटते-घटते 500 से 600 तक सीमित होकर रह गई है। इस ओपीडी की संख्या में भी वे मरीज ज्यादा हैं जिनमें कोरोना से संबंधित लक्षण सामने आने के बाद वे अपने को दिखाने अस्पताल आए या फिर बेहद गंभीर बीमारी वाले ही मरीज अस्पताल आए हैं। कोरोना की वजह से डेंटल मरीजों की संख्या न के बराबर रही है। पूरे कोरोना काल में एक भी डेंटल मरीज द्वारा न तो एक्सरे कराया है और न ही सर्जरी, क्योंकि कोरोना संक्रमण का संबंध मुंह से है और डेंटल सर्जरी भी मुंह में ही की जाती है। इसलिए संक्रमण से बचने न तो मरीजों ने ऑपरेशन के लिए कहा और न ही डॉक्टर ने इसे अनिवार्य बताया। इसी तरह अन्य गंभीर बीमारी के मरीजों की शल्य चिकित्सा में भी बहुत कमी आई है। जिला अस्पताल के सर्जन के मुताबिक डॉक्टर द्वारा भी केवल उन्हीं व्यक्ति के ऑपरेशन किए जा रहे हैं जिनका ऑपरेशन करना जरूरी है। जिन मरीजों की वर्तमान शारीरिक हालत को देखते हुए ऑपरेशन कुछ समय के लिए टाला जा सकता है तो उन्हें आगामी डेट दी गई है। धीरे-धीरे कोविड अस्पताल में तब्दील होता जा पूरा जिला अस्पताल जिला अस्पताल में अन्य मरीजों की संख्या घटने का एक प्रमुख कारण यह भी सामने आया है कि जुलाई माह के बाद एकाएक कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। 31 मार्च तक कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या मात्र 73 थी, जो अगले महीने 30 अगस्त तक बढक़र 337 पर पहुंच गई। वर्तमान में 9 सितंबर तक की स्थिति में कोरोना पॉजिटिव का कुल आंकड़ा 428 पर पहुंच गया है। हाल ही में जिला अस्पताल के कोविड वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या 70 से ऊपर तक पहुंच चुकी है। मरीजों की संख्या बढऩे से अस्पताल के ट्रॉमा केयर सेंटर यूनिट, चिल्ड्रन वार्ड, सर्जरी वार्ड, हड्डी वार्ड पहले ही टेक ओवर कर लिया गया है। कई ऐसे मरीज हैं जिन्हें बिना जांच के ही मेडिकल वार्ड में भर्ती कराया जा रहा है। जिससे अन्य मरीजों में डर बना हुआ है। कुल मिलाकर यह स्थिति अन्य मरीजों को अस्पताल आने से डरा रही है। सार्थक लाइट एप ने भी घटाए मरीज जिला अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती किए जाने के बाद अधिकांश लोगों ने सोचा कि वह निजी अस्पताल व मेडिकल से दवा लेकर अपना काम चला लेंगे। लेकिन इस सुविधा का लाभ मरीज ज्यादा दिन नहीं उठा पाए। जैसे ही कोरोना संक्रमित की कॉन्टेक्ट हिस्ट्री से सामने आया कि उसने मेडिकल स्टोर व निजी अस्पताल में इलाज कराया था। उसके बाद प्रशासन ने इन दोनों पर नकेल कसने कार्रवाई करते हुए सार्थक लाइट एप को इंस्टाल करने के साथ उस पर जानकारी अपडेट करना अनिवार्य कर दिया। इस व्यवस्था के बाद अधिकांश लोग निजी अस्पताल और मेडिकल से भी दवा नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में निजी अस्पताल व मेडिकल से दवा लेकर अपना इलाज कराने वाले मरीजों की संख्या काफी कम हो गई। इस पूरी व्यवस्था में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। हिन्दुस्थान समाचार / अभिषेक/राजूू-hindusthansamachar.in