कृषि बिल किसान कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदमः शिवराज
कृषि बिल किसान कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदमः शिवराज

कृषि बिल किसान कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदमः शिवराज

मुख्यमंत्री ने किसानों से किया संवाद भोपाल, 22 सितम्बर (हि.स.)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संसद में पारित कृषि बिल किसानों के कल्याण को सुनिश्चित करते हुए उनकी आय को दुगनी करने का महत्वपूर्ण कदम है। छोटे किसानों के लिए मध्यप्रदेश सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के साथ ही मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना प्रारंभ कर उन्हें 10 हजार रुपये वार्षिक देकर सहारा देने का कार्य करेगी। अभी-अभी केंद्र सरकार 2000 रुपये की तीन किश्त देकर योजना में छोटे किसानों को 6000 रुपये सालाना की मदद देती है। अब राज्य सरकार इसमें 4000 रुपये मिलाकर किसान को लाभान्वित करेगी। मुख्यमंत्री ने यह बातें मंगलवार देर शाम आकाशवाणी भोपाल से प्रसारित 'किसानों की बात - मुख्यमंत्री के साथ' कार्यक्रम में किसानों से संवाद करते हुए कही। आकाशवाणी के मध्यप्रदेश स्थित सभी केन्द्रों में इस कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 किसानों को किसी भी माध्यम से उत्पादों के व्यापार, कृषि करार के माध्यम से बुवाई के पूर्व उपज के लाभकारी दाम निर्धारित करने और कृषकों को उत्पादन की गिरावट की परिस्थिति में मूल्य वृद्धि से लाभ सुनिश्चित करने के सशक्त प्रावधान हैं। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इन किसान कल्याण के प्रावधानों के लिए धन्यवाद देते हैं। कुछ लोग इन प्रावधानों के संबंध में भ्रम फैला रहे हैं। वास्तविकता यह है कि कृषि बिल किसानों के लाभ को सुनिश्चित करते हैं। मध्यप्रदेश में किसानों को बिना ब्याज के कृषि ऋण देने, किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ देने, फसल बीमा की राशि देने का कार्य किया गया। पहले 3100 करोड़ और बाद में 4600 करोड़ रुपये प्रीमियम राशि दी गई। जिन किसानों की फसलें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उन्हें भी राहत राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि बिल के प्रावधान से किसान ताकतवार होगा। करार की स्थिति में फसल का ही करार होगा। जमीन किसान की ही रहेगी। उसके स्वामित्व को कोई ताकत चुनौती नहीं दे सकेगी। किसान को यह छूट होना ही चाहिए कि वह फसल कहीं भी बेचे। कृषि बिल में किसान से सीधे निर्यातकों को जोड़कर उन्हें बड़ी सुविधा प्रदान की गई है। फसल बोने के समय भी करार हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में किसानों से संवाद कर उनके सवालों के जवाब भी दिए। जबलपुर के खैरा ग्राम निवासी साधना पटेल ने पूछा - कृषि विधेयक जो संसद में पास हुआ है, हमें इसकी जरूरत क्यों पड़ी ? मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी किसानों की आय दुगनी करने के लिए चिंतित हैं। वे किसान हितैषी हैं। मण्डी में उपज नीलाम होती है। किसान सब्जी देकर जाता है तो उसे कमीशन भी देना होता है। नए कृषि बिल से किसान के घर से व्यापारी फसल खरीद सकता है। खेत से जाकर भी खरीद सकता है। ठीक दाम न मिले तो किसान का यह अधिकार है कि वह अन्य माध्यमों से फसल बेचे। किसान को विकल्प दिया गया है। इससे वो आने-जाने की झंझटों से भी बचेगा। भिण्ड के कल्याणपुरा निवासी कृष्ण कटारे ने पूछा- इस कृषि विधेयक से हम किसानों को क्या फायदा होगा ? मुख्यमंत्री ने कहा- कृषि विधेयक से आपको फायदा ही फायदा है। हानि कोई नहीं है। यह बिल किसान को सुविधा प्रदान करता है। आप पूरी तरह निश्चिंत रहे। भोपाल के शाहपुर निवासी रामजीवन मीणा ने पूछा-भाईसाहब, गांव में ऐसी चर्चा है कि इस विधेयक के आने से मंडियां बंद हो जाएंगी। क्या ये सही है ? मुख्यमंत्री ने कहा-कृषि उपज मंडी बंद नहीं होंगी। आप निश्चिंत रहें। हम अधोसंरचना को बेहतर बनाएंगे। व्यवस्थाएं और सटीक बनेंगी। कोई बेरोजगार नहीं होगा। एक लायसेंस से किसान को अधिकतम सुविधा मिलेगी। सुरक्षा निधि जरूर जमा कराई जाएगी। किसान को भुगतान भी तत्काल प्राप्त होगा। किसान के साथ प्रावधान के विपरीत जाकर कार्य करने वाले के लिए दण्ड की व्यवस्था भी की गई है। मंदसौर के बोलिया निवासी किशोर दांगी ने पूछा-मुख्यमंत्रीजी इस बिल के आने के बाद क्या किसान मंडियों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज नहीं बेच पाएंगे ? सीएम ने कहा-न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जारी रहेगी। आप सभी से कह दें कि यह व्यवस्था पहले की तरह रहेगी। केन्द्र सरकार ने कल ही गेहूं के समर्थन मूल्य की घोषणा की है। गेहूं 1925 की जगह 1975 रूपये प्रति क्विंटल, धान 1815 के स्थान पर 1868, मसूर 4800 के स्थान पर 5100, उड़द 5700 के स्थान पर 6000 रूपए पर ली जाएगी। अन्य फसलों के समर्थन मूल्य में भी वृद्धि हुई है। इनमें मूंग 7050 के स्थान पर 7196, अरहर 5800 के स्थान पर 6000, सरसों 4425 के स्थान पर 4650, चना 4875 के स्थान पर 5100, मूंगफली 5090 के स्थान पर 5275 और मक्का 1760 के स्थान पर 1850 प्रति क्विंटल खरीदी जाएगा। रीवा के रेहड़ा निवासी रमाकांत कुशवाह ने पूछा-इस विधेयक से किसान भाईयों को अनाज का सही दाम नहीं मिल पाएगा? और किसान की उपज के भुगतान में भी समस्याएं आएंगी? सीएम ने कहा-जो कानून बने हैं वे किसान को सही दाम दिलवाएंगे। किसान घर बैठे या खेत पर मौजूद रहकर फसल दे रहा है तो उसे यह सुविधा मिलेगी। उपज की कीमत के लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। यह सब व्यवस्थाएं किसान को उत्पादन का ठीक दाम देने के लिए ही की गई हैं। मुख्यमंत्री ने अन्य सवालों के जवाब भी दिये। हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश-hindusthansamachar.in