कमलनाथ ने झूठ की सारी सीमाओं को पार कियाः विष्णुदत्त शर्मा
कमलनाथ ने झूठ की सारी सीमाओं को पार कियाः विष्णुदत्त शर्मा
मध्य-प्रदेश

कमलनाथ ने झूठ की सारी सीमाओं को पार कियाः विष्णुदत्त शर्मा

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भोपाल, 19 सितम्बर (हि.स.)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने कहा है कि अपने ग्वालियर प्रवास के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने झूठ बोलने की सारी सीमाओं को पार कर दिया है। उन्होंने ग्वालियर-चंबल से उठे प्रश्नों के तूफान का मुकाबला करने की जगह मैदान छोड़ने की नीति अपनाई और किसान कर्जमाफी जैसे विषय पर सरेआम झूठ बोलते हुये ग्वालियर से जल्दी निकलने में ही भलाई समझी। शर्मा ने कमलनाथ से पूछा है कि जब उन्होंने कल ग्वालियर पहुंचने के बाद यह कहा था कि वे ग्वालियर में पूछे जा रहे एक-एक प्रश्न का उत्तर देंगे तो फिर बिना उत्तर दिये ग्वालियर से जल्दी क्यों खिसक लिये। पत्रकारवार्ता में उन्होंने 26 लाख किसानों के कर्जमाफी की बात कही, लेकिन यह नहीं बताया कि इन 26 लाख किसानों का कितना कर्जा माफ हुआ है और मध्यप्रदेश के किसानों पर कुल कितना कर्जा है। उन्होंने इस बात का भी कोई जवाब नहीं दिया कि कर्जमाफी के फर्जी प्रमाण-पत्रों के कारण जो किसान डिफॉल्टर हुये हैं, उनके जीवन का अब क्या होगा? कमलनाथ ने फसल बीमा योजना की प्रीमियम राशि को लेकर जो सफेद झूठ बोला है वह उनकी बेशर्मी की पराकाष्ठा है। शर्मा ने पूछा है कि कमलनाथ ने ग्वालियरवालों को चंबल एक्सप्रेस-वे का काम रोकने की वजह क्यों नहीं बताई ? उन्होंने ग्वालियर में एक हजार बिस्तर के अस्पताल, ओपन हार्ट सर्जरी की योजना और चंबल से पानी लाने की योजना को पलीता क्यों लगाया? कमलनाथ ने यह क्यों नहीं बताया कि उन्होंने 15 महीने में प्रदेश के एक भी युवा को बेरोजगारी भत्ता क्यों नहीं दिया, उन्होंने मेधावी छात्रवृत्ति योजना बंद की, कन्यादान योजना बंद की, एक भी गांव में गौशाला नहीं खोली। ग्वालियर के उद्योगों के बंद होने पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले कमलनाथ में सच्चाई बताने का साहस नहीं था, वर्ना वे यह बात जरूर बताते कि मालनपुर और बानमोर के अधिकांश उद्योग 2003 से पहले उस समय बंद हुये जब प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी। प्रदेश अध्यक्ष शर्मा ने कहा कि कमलनाथ जी के मुंह से संवैधानिक मर्यादाओं और संविधान की रक्षा जैसे शब्द सुनना कितना हास्यापद लगता है। कौन नहीं जानता कि कमलनाथ उस समूह के प्रमुख सदस्य थे, जिसने देश में आपातकाल लगाने का फैसला किया। संविधान की बात करने वालों को जेल में ठूंसकर कुचला गया। कमलनाथ जब मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने सबसे पहला फैसला आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों की पेंशन बंद करने का लिया। कमलनाथ संविधान का कितना आदर करते हैं यह समझा जा सकता है जब एक मुख्यमंत्री संविधान का हिस्सा बन चुके नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध रैली निकालता है। शर्मा ने कहा कि कमलनाथ ने जिस प्रकार से झूठे और स्तरहीन बयान दिये हैं, वह उनकी हताशा को दर्शाते हैं। हमारी मांग है कि कमलनाथ ने अपने डेढ़ दिन के ग्वालियर प्रवास के दौरान झूठ की जो महापुनर्रावृत्ति की है उसके लिये वे मध्यप्रदेश के नागरिकों और ग्वालियर-चंबल के वासियों से माफी मांगें। हिन्दुस्थान समाचार/केशव दुबे-hindusthansamachar.in