अधिकमास की अमावस्या पर मिलेगी कालसर्प व पित्र दोष से मुक्ति
अधिकमास की अमावस्या पर मिलेगी कालसर्प व पित्र दोष से मुक्ति
मध्य-प्रदेश

अधिकमास की अमावस्या पर मिलेगी कालसर्प व पित्र दोष से मुक्ति

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ग्वालियर, 14 अक्टूबर (हि.स.)। इस वर्ष 18 सितम्बर से शुरू हुए अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास का समापन शुक्रवार, 16 अक्टूबर को होने जा रहा है। इसके ठीक अगले दिन 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्य के अनुसार अमावस्या तिथि को पित्र दोष से मुक्ति पाने के लिए विशेष बताई गई है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म, स्नान दान के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ ही पित्र दोष पूजा कराना अधिक पुण्य फलदाई होता है क्योंकि इस तिथि के स्वामी पित्र देव माने गए हैं। इसके साथ ही इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में एक साथ रहते हैं। 16 अक्टूबर को सूर्य और चंद्रमा कन्या राशि में ही रहेंगे। दीपावली का त्यौहार भी अमावस्या के दिन ही मनाया जाता है। वही अमावस्या की तिथि को ही सूर्य ग्रहण लगता है। यह तिथि कालसर्प दोष से पीडि़त जातकों की मुक्ति को लिए भी असरदार मानी गई है। वहीं यदि कोई जातक और विशेष रोग कष्ट आदि से परेशान हैं तो इस दिन महामृत्युंजय जाप और अनुष्ठान कर कष्टों से निजात प्राप्त की जा सकती है। कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए होगी पूजा: शुक्रवार को अधिक मास की अमावस्या पर बालाजी धाम काली माता मंदिर पर कालसर्प दोष पितृदोष से मुक्ति के लिए विशिष्ट वैदिक ब्राह्मणों द्वारा विधि पूर्वक जातकों की पूजा संपन्न कराई जाएगी। यह पूजा सुबह 10 बजे से शाम 06 बजे तक होगी। हिन्दुस्थान समाचार/शरद-hindusthansamachar.in