the-great-poet-kalidas-is-universal-and-everlasting-gangadhar-panda
the-great-poet-kalidas-is-universal-and-everlasting-gangadhar-panda
झारखंड

सार्वदेशिक और सार्वकालिक हैं महाकवि कालिदास : गंगाधर पण्डा

news

रांची, 20 जून (हि.स.)। जमशेदपुर वर्कर्स महाविद्यालय के संस्कृत विभाग ने रविवार को ‘कालिदास साहित्य में लोकादर्श एवं मानव मूल्य’ पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसमें महाविद्यालय, विश्वविद्यालय और देश के विभिन्न भागों से विद्वानों एवं शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कोल्हान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो गंगाधर पण्डा ने कहा कि महाकवि कालिदास सार्वदेशिक और सार्वकालिक हैं। उनकी कृतियों की प्रासंगिकता वर्तमान सन्दर्भों में बहुत अधिक हैं। पण्डा ने कहा कि कालिदास साहित्य में प्रतिपादित राजधर्म वर्तमान समय के लिए अनुकरणीय है। कालिदास साहित्य के अनुशीलन से स्पष्ट होता है कि राजतन्त्र की प्रधानता रहने पर भी तत्कालीन राजा प्रजावत्सल होते थे, लोकाराधक थे। दिलीप, रघु, अज, राम, अतिथि, दुष्यन्त आदि इस दृष्टि से आदर्श हैं। उन्होंने कहा कि महाकवि कालिदास के अनुसार राजा को प्रजा को बुरे मार्ग पर जाने से रोकना चाहिए, अच्छा काम करने को प्रोत्साहित करना चाहिए, प्रजाजनों के लिए लिए अन्न, वस्त्र, धन तथा शिक्षा आदि का समुचित प्रबन्ध करना चाहिए। वह राजा राजा कहलाने का अधिकारी नहीं है को लोकाराधक न हो, प्रजावत्सल न हो। विश्वविद्यालय के आचार्य एवं अध्यक्ष तथा संगोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो प्रसून दत्त सिंह ने कहा कि सत्यं शिवं सुन्दरम् की उद्भावना से आप्यायित कालिदास का साहित्य मानवजीवन के समस्त शाश्वत सत्य मूल्यों के उपस्थापन में समर्थ होने के कारण ही शताब्दियों से लोकानुरंजन एवं विद्वन्मनः परितर्पण करते हुए युगानुरूप अर्थ-विच्छितियाँ संधारण करती हुई स्वयं को सार्थक एवं प्रासंगिक बनाने के वैशिष्ट्य से संवलित हैं। कालिदास ने धन को लोकवृत्ति का साधन तो माना है, लेकिन यश को उससे भी ऊपर स्थान दिया है। विशिष्ट वक्ता डॉ धनंजय वासुदेव द्विवेदी ने कहा कि नवनवोन्मेषशालिनी प्रतिभा से सम्पन्न महाकवि कालिदास ऐसे ही कवि हैं जिनकी कविता लोकजिह्वा पर नृत्य करती है। कालिदास की प्रसिद्धि उनकी लोकदृष्टि के कारण समाहित है। वे लोक कवि हैं। कालिदास की यही लोकसम्पृक्ति ही उनको अन्य कवियों से श्रेष्ठ बनाती है। द्विवेदी ने कहा कि महाकवि कालिदास का स्मरण करते ही भारतीय दृष्टि और सृष्टि की मानक परम्परा का अत्यन्त प्रोज्वल, सार्थक, साभिप्राय एवं दूरदर्शी रूप अपनी सर्वांगपूर्णता में दृष्टिगोचर होता है। कालिदास की दृष्टि में लोकजीवन की सिद्धि का मार्ग तप है। इस अवसर पर जमशेदपुर वर्कर्स महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ सत्यप्रिय महालिक, लाडली कुमारी, अर्चना कुमारी गुप्ता तथा कुमारी प्रियंका आदि उपस्थित थीं। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण