initiative-to-connect-women-in-extremism-affected-areas-with-employment
initiative-to-connect-women-in-extremism-affected-areas-with-employment
झारखंड

उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की शरू हुई पहल

news

04/04/2021 -नाबार्ड के आजीविका एवं उद्यम कार्यक्रम के तहत मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण रोजगार मिलने से लोगों का मुख्यधारा में शामिल रहना संभव : विधायक हजारीबाग, 4 अप्रैल (हि. स. )। जिले के उग्रवाद प्रभावित चुरचू प्रखंड के नगड़ी में अब विकास की बयार बहने लगी है। पुरुषों की कौन कहे महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उन्हें समाज की मुख्यधारा में बनाये रखने का काम किया जा रहा है। इसी क्रम में नाबार्ड के आजीविका एवं उद्यम कार्यक्रम के तहत महिलाओं को रोजगार से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। क्लस्टर मोड में प्रारंभ की गई इस पहल के तहत जन जागरण केंद्र एवं होली क्रॉस कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से डेढ़ सौ महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 10 दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण में 15 स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 150 महिलाओं को 5 ग्रुपों में विभक्त कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मांडू विधायक जयप्रकाश भाई पटेल ने रविवार को प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। विधायक ने कहा कि लोगों को रोजगार से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में बनाए रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बहुत विकल्प है और वह लोगों को वृहद पैमाने पर रोजगार देने का काम कर सकती है, हालांकि उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार लोगों को रोजगार मुहैया कराने में विफल साबित हो रही है। नाबार्ड के डीडीएम प्रेम प्रकाश सिंह ने कहा कि कलस्टर मोड में न केवल मशरूम उत्पादन के लिए महिलाओं को प्रेरित किया जा रहा है, बल्कि इसके लिए हजारीबाग, रांची, बनारस, कोलकाता जैसे शहरों में बाजार की भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं ने समग्र रूप में अच्छा काम किया तो प्रतिमाह न्यूनतम ₹5000 से लेकर ₹10000 तक आय प्राप्त कर सकती हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही ज्योति श्री ने बताया कि पहले उग्रवाद प्रभावित होने के कारण इस क्षेत्र में सुविधाओं का अभाव था, अब वे सभी मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इसका लाभ उन्हें खुद के आत्मनिर्भर बनने में होगा और वे घर का काम भी बेहतर ढंग से कर पाएंगी। बच्चों को अच्छे से पढ़ा पाएंगी और उनका बेहतर शादी ब्याह भी सकेंगी। सोनी देवी ने बताया कि डेढ़ सौ महिलाओं को मशरुम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार / शाद्वल