निजी विद्यालयों के शिक्षक - शिक्षिकाओं के रोजगार पर विचार करें सरकार

निजी विद्यालयों के शिक्षक - शिक्षिकाओं के रोजगार पर विचार करें सरकार
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04/05/2021 रामगढ़, 04 मई (हि.स.)। कोरोना काल में समाज का हर वर्ग प्रभावित हो गया है। झारखंड में सबसे ज्यादा बुरी स्थिति शिक्षा विभाग की है। पिछले 15 महीनों से एक सबसे बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग इसका दंश झेल रहा है। मार्च 2020 से मई 2021 के बीच व्यापारिक प्रतिष्ठान, दफ्तर, और अन्य सभी वस्तुओं को लेकर सरकार ने गाइडलाइन जारी की। लेकिन इतने लंबे वक्त तक निजी विद्यालयों में ताला लटका रहा। इसकी वजह से निजी विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं की आर्थिक स्थिति डामाडोल हो गई है। हालांकि कोरोना काल में भी निजी विद्यालयों ने अपने बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए दिन रात मेहनत की। लेकिन उनकी मेहनत का प्रतिफल यह हुआ कि आज उन्हें आर्थिक दंश झेलना पड़ रहा है। उन लोगों की सहायता के लिए ना तो सरकार ने ही कुछ सोचा और ना ही सामाजिक स्तर पर इतने बड़े वर्ग को कोई सहायता मिली। एक निजी विद्यालय की शिक्षिका गोला निवासी काजल शंखवार के बताया कि पूरे परिवार का भरण पोषण काफी मुश्किल से हो रहा है। यह तो एक उदाहरण मात्र है। जिले के निजी विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक और शिक्षिकाओं के समक्ष यही स्थिति है। लॉकडाउन लागू होते समय सरकारी निर्देश और जारी परिपत्र के अनुसार शिक्षकों को वेतन मिलना चाहिए था। लेकिन स्कूल प्रबंधन शिक्षकों को वेतन नहीं दे रहे। 22 अप्रैल से पुन: लॉकडाउन है। शैक्षणिक प्रतिष्ठान पूरी तरीके से बंद हैं। लॉकडाउन के दौरान सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा। लेकिन हजारों निजी स्कूलों के शिक्षकों को सरकार ने बेरोजगार नहीं मानते हुए, अब तक कोई पहल नहीं की। शिक्षित बेरोजगार एवं विद्वान शिक्षकों के समक्ष वर्तमान परिस्थिति में आजीविका का संकट उत्पन्न हो गया है। हिन्दुस्थान समाचार/अमितेश