शिक्षा की दशा व दिशा को नई गति प्रदान करेगी नई शिक्षा नीति : गौतम महतो
शिक्षा की दशा व दिशा को नई गति प्रदान करेगी नई शिक्षा नीति : गौतम महतो
झारखंड

शिक्षा की दशा व दिशा को नई गति प्रदान करेगी नई शिक्षा नीति : गौतम महतो

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रामगढ़, 30 जुलाई (हि.स.) । देश में 34 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति लागू हुई है। यह निति शिक्षा की दिशा और दशा को नई गति प्रदान करेगी। यह बात गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जिला संयोजक गौतम कुमार महतो ने कही। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति लागू किया जाना शिक्षा की क्रांति के लिए स्वागतयोग्य व सराहनीय फैसला है। मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। स्पष्ट रूप से शिक्षा को पुनः सर्वोपरि मानना इस परिवर्तन का मुख्य कारण है। नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को इसरो प्रमुख रहे के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञों की समिति ने तैयार किया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने 1 मई को इसकी समीक्षा की थी। विद्यालयीय शिक्षा में 5+3+3+4 के मजबूत शैक्षणिक ढांचे से प्रत्येक बच्चे को प्रारम्भिक काल में ही आवश्यक आधार प्राप्त होनेवाला है। इसका मूल रूप से अभाव था। ईसीसीई के अंतर्गत प्री प्राइमरी शिक्षा आंगनबाड़ी और स्कूलों के माध्यम से संचालित किए जाएंगे। शिक्षा की व्यापकता अनौपचारिक पारिवारिक शिक्षा से औपचारिक शिक्षा जुड़ जाए इसकी आवश्यकता थी। पूर्व में परिवार में सीख रहे बच्चे विद्यालय की नई दुनिया में अचानक प्रवेश करते हुए अनभिज्ञ से लगते थे। अब प्रारम्भ के पांच वर्ष को फॉउंडेशन स्टेज के पांच वर्ष में स्थानीय, क्षेत्रीय या मातृभाषा को समान रूप से माध्यम बनाते अनौपचारिक पारिवारिक शिक्षा के माहौल से बच्चों को आगे के प्री प्राइमरी स्टेज के लिए स्वाभाविक रूप से तैयार किया जा सकेगा। स्कूली शिक्षा तीन भाषा पर आधारित होगी। जिसमे फॉरेन लैंग्वेज कोर्स भी शामिल होंगे। स्थानीय भाषा यानी मातृभाषा में उपलब्ध हो शिक्षा के तहत 8 साल तक के बच्चे किसी भी भाषा को आसानी से सीख सकते हैं। कई भाषाएँ जानने वाले छात्रों को भविष्य में करियर में भी अच्छा स्कोप मिलता है। इसी लिए उन्हें कम से कम तीन भाषाओं की जानकारी दी जाए। गौतम महतो ने कहा कि नया पाठ्यक्रम के तहत नए तौर-तरीके से युक्त पहले 5 वर्ष तक के बच्चों को फाउंडेशन स्टेज में रखा जाएगा। उसके बाद के 3 साल के बच्चों को प्री-प्राइमरी स्टेज में रखा जाएगा। अगले 3 वर्ष वाले लैटर प्राइमरी में रहेंगे। मिडिल स्कूल के पहले 3 साल में छात्रों को प्राइमरी समूह में रखा जाएगा। 9वीं से 12वीं तक तक छात्र सेकेंडरी स्टेज में रहेंगे। शिक्षकों की गुणवत्ता के लिए सेकंडरी लेवल तक शिक्षक पात्रता परीक्षा टेट लागू होना आवश्यक कदम है। राज्यों के लिए संस्था में सभी राज्यों में पठन-पाठन पर नज़र बनाए रखने के लिए स्वतंत्र ‘स्टेट स्कूल रेगुलेटरी बॉडी’ का गठन किया जाएगा। ये सभी राज्यों में अलग-अलग होगी। इसके चीफ शिक्षा विभाग से जुड़े होंगे। शिक्षक प्रशिक्षण के लिए इंटर के बाद 4 ईयर इंटेग्रेटेड बीएड के अलावा 2 ईयर बीएड या 1 ईयर बीएड कोर्स चलेंगें। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से हटाए जाने की बातें सराहनीय है। सिर्फ चुनाव ड्यूटी लगेगी, बीएलओ ड्यूटी से शिक्षक हटेंगे। मध्यान भोजन से भी शिक्षकों को मुक्त किया जाएगा। स्कूलों में एसएमसी, एसडीएमसी के साथ एससीएमसी यानी स्कूल कॉम्प्लेक्स मैनेजमेंट कमेटी बनाई जाएगी। शिक्षक नियुक्ति में डेमो ,स्किल टेस्ट और इंटरव्यू को भी शामिल किया जाना गुणवत्ता के लिए सार्थक पहल है। हिन्दुस्थान समाचार/अमितेश/वंदना-hindusthansamachar.in