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झारखंड

एमडीए के तहत जिले के हर व्यक्ति को खिलाई जाएगी फाइलेरिया की दवा : डीसी

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रामगढ़, 19 फरवरी (हि.स.)। जिले में स्वास्थ्य विभाग के द्वारा मांस ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन चलाया जाएगा। इसके तहत जिले के प्रत्येक व्यक्ति को फाइलेरिया की दवा खिलाई जाएगी। यह बात शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीसी संदीप सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने 22 से 27 फरवरी तक एमडीए अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिला वासियों को फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि रामगढ़ जिले में कुल 2044 बूथ बनाए गए हैं। जहां 6 दिनों तक फाइलेरिया की दवा लोगों को खिलाई जाएगी। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोगों को स्वास्थ्य कर्मियों की मौजूदगी में दवा खिलाई जानी है। इस कार्य में 4089 कार्यकर्ताओं को लगाया गया है। अभियान की निगरानी में 409 सुपरवाइजर भी लगे हैं। सभी प्रखंडों को डीईसी टेबलेट और एल्बेंडाजोल टेबलेट भी उपलब्ध कराया गया है। कुछ लोगों को उनके डीईसी तथा कुछ लोगों को एल्बेंडाजोल खिलाई जानी है। यह एकल खुराक है, जिससे फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। 294 लोगों में लिखे हैं फाइलेरिया के लक्षण : सिविल सर्जन प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिविल सर्जन डॉक्टर साथी घोष ने बताया कि रामगढ़ जिले में कुल 294 लोगों में फाइलेरिया के लक्षण दिखे हैं। 234 लोग फाइलेरिया से ग्रसित हैं और 60 लोग हाइड्रोसील की बीमारी से पीड़ित हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि लोगों को इस बीमारी के होने का पता ही नहीं चलता है। यह धीमी गति से शरीर में जगह बनाता है। इस बीमारी से ग्रसित लोगों को 5 साल के बाद ही इसका पता चलता है। हाथी पांव और हाइड्रोसील की बीमारी भी फाइलेरिया के लक्षणों में से एक हैं। हाइड्रोसील का ऑपरेशन आराम से हो जाता है। लेकिन एक बार यदि हाथी पांव हो गया तो उसका इलाज आसान नहीं है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने शरीर को फाइलेरिया के कीटाणु से दूर ही रखें। रामगढ़ में तीन वर्षों तक चलेगा मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन विश्व स्वास्थ्य संगठन के चिकित्सक डॉ मनोज कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि जिले में मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अगले 3 वर्षों तक चलाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि पहले फाइलेरिया की दवा घर घर पहुंचाई जाती थी। घर में मौजूद सदस्यों की संख्या के अनुसार दवा दी जाती थी। लेकिन सितंबर 2020 में जब सर्वे हुआ तो पता चला कि रामगढ़ जिले में अभियान पूरी तरह से सफल नहीं हो पाया है। इसलिए यह औसत से अधिक फाइलेरिया के मरीज भी मिले हैं। यही वजह है कि इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन ने रामगढ़ में तीन वर्षों तक मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन चलाकर जिले के प्रत्येक व्यक्ति को फाइलेरिया की दवा सामने खिलाने का लक्ष्य रखा है। हिन्दुस्थान समाचार/ अमितेश

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