बगैर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान पूरी तरह अव्यवहारिक :बाबूलाल मरांडी
बगैर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान पूरी तरह अव्यवहारिक :बाबूलाल मरांडी
झारखंड

बगैर मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान पूरी तरह अव्यवहारिक :बाबूलाल मरांडी

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रांची, 23 जुलाई ( हि.स.) झारखंड में भारतीय जनता पार्टी विधायक दल के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार ने वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से कैबिनेट की बैठक में झारखंड संक्रामक रोग अध्यादेश के कुछ बिन्दुओं पर जो निर्णय लिया है वह न्यायोचित प्रतीत नहीं होता है। मरांडी ने गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लिखे अपने पत्र में कहा कि बगैर मास्क पहने बाहर निकलने और सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और कड़ी सजा का प्रावधान पूरी तरह अव्यवहारिक है। इसके अलावा भी कई बिन्दु पर पुर्नविचार करने की जरूरत है। कोरोना पर अंकुश लगे, यह सबकी प्राथमिकता व चाहत है। परंतु इसकी सख्ती के नाम पर राज्य की जनता के दोहन के दरवाजे खोलने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। कोई भी प्रावधान लागू करने से पूर्व तमाम पहलूओं पर बारीकी से विचारोपरांत ही निर्णय लेना उचित होगा। राज्य की आम जनता की तमाम आर्थिक व सामाजिक परिस्थितियों पर भी गौर करना होगा। राज्य में अधिकांशः आबादी गांव और अनुमंडल स्तर पर बसती हैं। जहां बहुतायत गरीब होते हैं। ऐसे में इतना भारी अर्थदंड व कड़ी सजा उचित नहीं ठहराया जा सकता है। इन्हें एक अभियान के तहत जागरूक करने की अधिक जरूरत है। ऐसा नहीं हो कि इस कानून की आड़ में पुलिस के लिए कमाई का एक बड़ा और सहज और सुलभ जरिया खुल जाए और राज्य सरकार का मूल मकसद कहीं दूर बहुत पीछे न छूट जाए। पूर्व के कुछ अन्य मामलों में ऐसी ही सख्ती का अनुभव राज्य सरकार के लिए कड़वा भी रहा है।मरांडी ने कहा कि सवाल मुंह और नाक ढ़कने का है, न कि भारी जुर्माना व कड़ी सजा के प्रावधान का। अक्सर देखा जा रहा है कि जिनपर यह कानून या नियम अमल करवाने की जिम्मेवारी होती है, वे स्वयं इस नियम की खानापूर्ति और औपचारिकता निभाते दिखते हैं। उन लोगों के द्वारा कहीं मास्क नाक और मुंह के नीचे तो कहीं कान में सिर्फ लटकाए हुए देखा जा सकता है। मानो सिर्फ नाम के लिए उन्होंने मास्क पास में रखा हो। इस कारण राज्य के आम लोगों पर सरकार के नियमों का व्यापक और सकारात्मक प्रभाव नहीं हो पाता है। कहने का आशय है कि दूसरों को कानून का पाठ पढ़ाने के पहले हमें खुद उसका अनुसरण करना होगा। कुछ राज्यों में मास्क नहीं पहनने पर सरकार ने महज 50 रूपये का जुर्माना तो लगाया है पंरतु साथ ही दो मास्क भी मुफ्त में देने का प्रावधान किया गया है। ताकि लोगों को मास्क के उपयोग की आदत डाली जा सके। मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि सरकार की सख्ती का मतलब किसी निर्णय का अव्यवहारिक होना उचित नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस मामले में सभी पहलुओं पर विचारोपरांत ही निर्णय लेने का आग्रह किया है। हिंदुस्थान समाचार /विनय/सबा एकबाल-hindusthansamachar.in