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झारखंड

'बजट में आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के महत्पूर्ण योजनाओं में हुई कटौती''

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रांची, 06 मार्च (हि.स.)। झारखंड के 2021-22 बजट में आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय के महत्पूर्ण योजनाओं में कटौती की गयी। हालांकि, झारखंड बजट में पिछले वर्ष की अपेक्षा 5.68 प्रतिशत बढ़ोत्तरी अच्छा संकेत है। लेकिन यह बढ़ते महंगाई और करोना के कारण उत्पन्न संकट को देखते हुए काफी कम है। झारखंड के आदिवासी, दलित और अल्पसंख्यकों के अनुरूप बजट नहीं के बराबर है। यह बातें शनिवार को रांची स्थित एचआरडीसी में दलित आर्थिक अधिकार आंदोलन और भोजन के अधिकार अभियान के वक्ताओं ने पत्रकार वार्ता में कही। वरिष्ठ समाजिक कार्याकर्ता बलराम ने कहा कि झारखंड के 2021-22 बजट में स्वास्थ्य, भोजन और पोषण तथा शिक्षा को केन्द्रित कर बजट होना चाहिए था, लेकिन इस बजट में आदिवासी एवं दलित समुदाय के मुख्य समस्या स्वास्थ्य, भोजन और पोषण को केंद्रित नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता को वर्तमान सरकार से आशा थी कि बजट में आदिवासी, दलित एवं अल्पसंख्यकों के विकास को केंद्रित किया जायेगा, लेकिन इनकी योजनाओं में इस वर्ष कटौती कर दी गई है, जबकि इस बढ़ाया जाना चाहिए था। दलित आर्थिकार आंदोलन-एनसीडीएचआर के राज्य समन्वय मिथिलेश कुमार ने कहा कि झारखंड 2021-22 के बजट में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यांक और अन्य पिछड़े वर्ग कल्याण विभाग के लिए पिछले वर्ष 124.41 करोड़ रुपये का आवंटन था जो कि इस बार घटकर 123.71 करोड़ रुपये हुआ है। यह काफी कम है। अगर शिक्षा कि बात करें तो छात्रों के लिए महत्वपूर्ण योजना पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप के लिए 2021.22 के बजट में अनुसूचित जाति को 25 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है तथा अनुसूचित जनजाति के लिए सात करोड़ रुपये दिए गए हैं, जबकि 2020-21 में अनुसूचित जाति के लिए 27 करोड़ और अनुसूचित जनजाति के 11 करोड़ का आवंटन था, जो इस वर्ष काफी कम है। इस अवसर पर मनोज कुमार भुइयां, अमेरिका उरांव, उदय सिंह सहित कई आदिवासी और दलित नेता उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/ कृष्ण/चंद्र