झारखंड

स्थायीकरण की मांग को लेकर सहायक पुलिस कर्मी मोरहाबादी में हड़ताल पर बैठे

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रांची, 12 सितम्बर (हि.स.)। राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों के ढाई हजार सहायक पुलिसकर्मी शनिवार को रांची के मोरहाबादी मैदान में स्थायीकरण की मांग को लेकर डटे हुए है। सहायक पुलिस कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार को डीआईजी अखिलेश झा तथा एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा से मिला। इस दौरान डीआईजी ने उनकी मांगों को नजायज बताते हुए कहा कि आप लोग गलत कर रहे हैं। प्रतिनिधि मंडल में शामिल सतीश कुमार ने बताया कि डीआईजी ने कहा कि आप लोग जो पैदल मार्च कर के आए वह भी नाजायज है। आप लोग का मानदेय 10000 ही रहेगा। आप लोगों की टीए और डीए को लेकर लेटर जारी होगा। वार्ता विफल होने के बाद सहायक पुलिस कर्मी मोरहाबादी में हड़ताल पर रहने का निर्णय लिए है। इसके बाद सभी सहायक पुलिस कर्मी मोराबादी में हड़ताल पर बैठ गए हैं।सहायक पुलिस कर्मियों में महिलाएं भी हैं,जो बच्चों को गोद में लेकर 24 घंटे पैदल चल कर यहां पहुंची है। सात महीने की बच्ची के साथ मनीता देवी और 7 महीने की प्रेग्नेंट फुलेश्वरी देवी ने कहा कि अगर आज हमने अपने हक की आवाज नहीं उठाई तो अपने बच्चों को अच्छा भविष्य नहीं दे पाएंगे। लोहरदगा से 7 महीने की बच्ची के साथ आईं मनीता देवी ने कहा कि वे 3 साल से नौकरी कर रहीं हैं। एक साल की ट्रेनिंग की। उनकी 3 बेटियां हैं। 2012 में शादी के बाद से अब तक पति मजदूरी कर रहे हैं, लेकिन कोरोना में उन्हें भी कहीं काम नहीं मिल रहा है। लोहरदगा की मनीता देवी ने बताया कि वे रांची के लिए शुक्रवार सुबह साथियों के साथ घर से निकलीं थी। पैदल ही 80-85 किलोमीटर की दूरी तय की और शनिवार सुबह 8 बजे रांची पहुंची हूं। रात भी हमने सड़क के किनारे ही गुजारी। रास्ते के लिए घर से कुछ सूखा राशन लेकर आए थे, वही खाया। अब सरकार इतने पैसे भी नहीं देती कि बच्ची और खुद के लिए कुछ खरीदकर खा सकूं। उन्होंने बताया कि कोरोनाकाल में वे अपनी बच्ची को लेकर कोविड सेंटर में ड्यूटी करती थीं। तब बच्ची 2 महीने की थी। कोरोना की वजह से उन्हें काम नहीं मिल रहा। ऊपर से अब अनुबंध खत्म हो जाने के बाद उनकी भी नौकरी नहीं रहेगी तो घर कैसे चलेगा? उल्लेखनीय है कि स्थायीकरण की मांग को लेकर 7 सितंबर से सहायक पुलिस कर्मी हड़ताल पर चल रहे हैं। 2017 में राज्य के 12 नक्सल प्रभावित जिलों में 25 सहायक पुलिस कर्मियों की 10000 रुपये मानदेय पर नियुक्ति की गई। सहायक पुलिस कर्मियों का कहना है कि नियुक्ति के समय में बताया गया था कि 3 साल बाद उनकी सेवा स्थाई हो जाएगी। लेकिन 3 वर्ष पूरा होने के बाद भी किसी का स्थायीकरण नहीं हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/ विकास/विनय-hindusthansamachar.in