सेना और पुलिस में नहीं हो सका बहाल, तो पुनई उरांव ने उठाया था हथियार
सेना और पुलिस में नहीं हो सका बहाल, तो पुनई उरांव ने उठाया था हथियार
झारखंड

सेना और पुलिस में नहीं हो सका बहाल, तो पुनई उरांव ने उठाया था हथियार

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रांची, 23 दिसम्बर (हि.स.)। रांची से 15 किलोमीटर दूर हुई पुलिस मुठभेड़ में दो लाख का इनामी पीएलएफआई का एरिया कमांडर पुनई उरांव आर्मी और पुलिस से जुड़कर देश सेवा करना चाहता था। परिजनों ने बताया कि वह आर्मी और झारखंड पुलिस की बहाली रैली में भी शामिल हुआ था ।लेकिन सेना और पुलिस में बहाल नहीं होने पर उसने उग्रवादी संगठन पीएलएफआई से जुड़कर हथियार उठा लिया। बेरोजगारी के कारण उसने ऐसा कदम उठाया। तेजतर्रार होने की वजह से वह पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप का करीबी बन गया था। वह रांची में रहकर लेवी वसूलने का काम करता था। वसूले गए लेवी को दिनेश गोप तक पहुंचाता था। पुनई उरांव इटकी थाना क्षेत्र के गढ़गांव निवासी घूरचु उरांव का पुत्र था। पुनई उरांव ने मैट्रिक और इंटर की परीक्षा फर्स्ट डिवीजन से पास की थी। पुनई उरांव फुटबॉल का अच्छा खिलाड़ी था। उसके घर के कई लोग अच्छे पदों पर हैं। चाचा बोकारो स्टील प्लांट में इंजीनियर है, जबकि मामा पुलिस में दरोगा हैं। उसके घरवाले चाहते थे कि वह पुलिस के पास सरेंडर कर मुख्यधारा में लौट आए। घर के लोगों से उसकी मुलाकात नहीं होती थी। कभी कभार पर्व त्यौहार में वह अपने घर आया करता था और चला जाता था। पुनई उरांव पर रांची और खूंटी जिले में हत्या रंगदारी लेवी वसूली के लगभग 14 मामले दर्ज थे। जब पुलिस ने पुनई उरांव को घेरा तो उसने पिस्टल से गोलियां चलाई उसके पिस्टल में 10 गोलियां थे उसने 4 राउंड फायरिंग की थी। इसी बीच पुलिस की गोली उसके सिर में लगी और वह 15 मिनट की हुई मुुुठभेड़ ढ़ेर हो गया। रात भर चला सर्च ऑपरेशन, नहीं पकड़े गए एक भी उग्रवादी रांची-खूंटी बार्डर के नगड़ी इलाका स्थित लोधमा जंगल में एनकाउंटर के बाद पुलिस ने पूरी रात सर्च अभियान चलाया। हालांकि पुनई उरांव के ढेर होने के बाद दस्ते के अन्य उग्रवादियों ने इलाका छोड़ दिया है। वह जंगल छोड़कर सुरक्षित इलाके में शरण ले चुके हैं। एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा और ग्रामीण एसपी नौशाद आलम के नेतृत्व में रांची पुलिस की टीम ने मंगलवार की पूरी रात लोधमा और कर्रा से सटे जंगलों में भी सर्च अभियान चलाया। पुलिस की टीम उग्रवादियों की तलाश में खूंटी तक भी गई। लेकिन पुनई के दस्ते में शामिल एक भी उग्रवादी नहीं पकड़ा गया। बंदूक थामे मिला नक्सली का शव दूसरी और मंगलवार देर शाम मुठभेड़ में मारे गए नक्सली पुनई उरांव का शव रात भर जमीन पर पड़ा रहा। पुनई का शव सुबह तक फायरिंग के पोजीशन में पड़ा हुआ था। ठंड में पुनई का हाथ पूरी तरह से जकड़ गया था। पुलिस ने बुधवार को मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। उल्लेखनीय है कि बीते 22 दिसंबर की देर शाम दो लाख का इनामी पुनई उरांव मुठभेड़ में मारा गया था। एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा को मिली गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस को यह कामयाबी मिली थी। 21 दिसंबर को खूंटी जिले की पुलिस ने मुठभेड़ में पीएलएफआई के 15 लाख के इनामी जीदन गुड़िया को मार गिराया था। हिन्दुस्थान समाचार/ विकास-hindusthansamachar.in