सत्ता में रहकर करोड़ों रुपये का गोलमाल करने वाले भाजपा नेताओं की खुमारी अब भी नहीं टूटी है : कांग्रेस
सत्ता में रहकर करोड़ों रुपये का गोलमाल करने वाले भाजपा नेताओं की खुमारी अब भी नहीं टूटी है : कांग्रेस
झारखंड

सत्ता में रहकर करोड़ों रुपये का गोलमाल करने वाले भाजपा नेताओं की खुमारी अब भी नहीं टूटी है : कांग्रेस

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रांची, 11 सितम्बर (हि. स.)। कांग्रेस ने पर्यावरण स्वीकृति लिये बिना झारखंड हाईकोर्ट और विधानसभा के नवनिर्मित भवन का निर्माण कराये जाने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास और अन्य भाजपा नेताओं से अपनी गलती स्वीकार कर जुर्माने की राशि का भुगतान कर अपने ऊपर लगे पाप के कलंक को धोने की मांग की है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे, लाल किशोरनाथ शाहदेव और राजेश गुप्ता ने शुक्रवार को कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने इन दोनों भवनों के निर्माण में एनजीटी द्वारा निर्धारित मानकों और अन्य मापदंड का पालन नहीं किया। जिसके कारण यह जुर्माने की राशि लगायी गयी है और इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार ही पूरी तरह से जिम्मेवार है। प्रवक्ताओं ने कहा कि भाजपा नेता एनजीटी के आदेश के बाद इधर-उधर की बात करना छोड़ कर जुर्माने की राशि का प्रबंध करना शुरू कर दें, क्योंकि कुछ लोगों की मनमर्जी और व्यक्तिगत स्वार्थ और वाहवाही लूटने की मंशा का पूरे राज्य की जनता परिणाम नहीं भुगत सकती। इसलिए पार्टी राज्य सरकार से मांग करती है कि एनजीटी ने जुर्माना लगाया है, उसकी भरपाई तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास, उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगियों, तत्कालीन मुख्य सचिव और जिम्मेवार अधिकारियों तथा संवेदकों की संपत्ति से किया जाए। प्रवक्ताओं ने कहा कि सत्ता में रहकर करोड़ों रुपये का गोलमाल करने वाले भाजपा नेताओं की खुमारी अब भी नहीं टूटी है, अब वे छाया मंत्रिमंडल का गठन करने की बात कर रही है, जिसकी कोई संवैधानिक मान्यता नहीं है। ऐसा कर भाजपा नेता सिर्फ लोगों के बीच भ्रम पैदा करना चाहते है और उनकी यह कोशिश है किसी भी तरह से सत्ता का सुख हासिल किया जाए, जबकि जनता ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया गया है। अब शैडो कैबिनेट गठन की कोई औचित्य नहीं है। प्रवक्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा रोजगार के मसले को लेकर उठाये गये सवाल पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी सरकार में मोमेंटम झारखंड के नाम किस तरह का खेल हुआ। इससे सभी परिचित है, रोजगार देने के नाम पर कई बेरोजगार युवक-युवतियों को पांच-सात हजार रुपये की नौकरी के लिए चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली-कोलकाता जैसे महानगरों में भेज दिया गया। कुछ ही दिनों में सभी वापस लौट आये। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में भी सैकड़ों एमओयू हुआ, लेकिन भाजपा नेतृत्व वाले शासनकाल में जूता सिलाई की एक कंपनी भी नहीं खुल सकी। वहीं पुरानी कंपनियां बंद हो गयी। ऐसे लोगों को रोजगार के मसले पर हेमंत सोरेन सरकार पर टिप्पणी करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण/विनय-hindusthansamachar.in