वन जीवों की देखभाल करने में लापरवाही का मामला तूल पकड़ा
वन जीवों की देखभाल करने में लापरवाही का मामला तूल पकड़ा
झारखंड

वन जीवों की देखभाल करने में लापरवाही का मामला तूल पकड़ा

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मेदिनीनगर, 27 जुलाई (हि.स.)। पलामू टाईगर रिर्जव के बेतला नेशनल पार्क में 15 जुलाई को हुई हाथिनी की मौत पर सवाल उठने शुरु हो चुके हैं। हथिनी की आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने का कोई सबूत नहीं मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि हथिनी के सिर में करीब छह इंच का एक छेद था, जिसमें कीड़े लगे हुए थे। हथिनी की मौत को लेकर गोली लगने की बातें की जा रही थी। वन विभाग के अधिकारी इस मामले में कोई भी जवाब देने से बच रहे हैं । पोस्टमार्टम रिर्पोट आने के बाद अब यह प्रश्न उठने लगा है कि आखिर हाथिनी की सिर में जो घाव था उसका समय रहते विभाग ने इलाज क्यों नहीं कराया। अगर हथिनी की सिर पर घाव की जानकारी वन विभाग के अधिकारियों को नहीं थी तो यह यह एक घोर लापरवाही की बात सामने आती है। इस मामले में निर्दलीय विधायक सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर पलामू टाइगर रिजर्व के बेतला में मृत पायी गई हथिनी की मौत की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। हथिनी की मौत पर प्रश्न उठने के बाद टाइगर प्रोजेक्ट के निदेशक वाईके दास का कहना है कि डीएफओ नार्थ के नेतृत्व में उच्चस्तरीय टीम गठित की गई है। हथिनी के शव का मेटल डिडेक्टर और कार्बनिक जांच भी हुई, लेकिन कोई सबूत नहीं मिला है। वाईके दास ने बताया है कि किसी नुकीली चीज से टकराने या हाथियों के आपसी लड़ाई में हथिनी को चोट लगी होगी, लेकिन पूरी तरह से आश्वस्त होने के लिए जांच टीम गठित की गई है। हाथी जब हथिनी के साथ मिलाप करती है तो कभी-कभी आपसी टकराहट भी होती है। ऐसा संभव है कि हथिनी की ओर से मिलाप का विरोध करने पर टकराव हुई हो। शुरूआत में हथिनी की मौत का कारण निमोनिया बताया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि हथिनी को न्यूरोशॉक हुआ था, जिस कारण उसकी सांस रुक गई थी और दिल ने काम करना बंद कर दिया था। हथिनी की मौत की बड़ी वजह न्यूरोशॉक बताया गया है। हिन्दुस्थान समाचार/संजय/वंदना-hindusthansamachar.in