रोटी के सामने इंसान कितना विवश है
रोटी के सामने इंसान कितना विवश है
झारखंड

रोटी के सामने इंसान कितना विवश है

news

देवघर, 27 जुलाई (हि.स.) कहा जाता है रोटी इंसान को कुछ भी करने पर विवश कर देती है। यह कोई नई बात नहीं की रोटी के सामने इंसान इतना विवश है। देवघर के मोहम्मद मुर्तजा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है । दरअसल मुर्तजा के लिए एक वक्त की रोटी ही सब कुछ है। रोटी के सामने धर्म और नियम कायदे कानून कुछ भी मायने नहीं रखते । मोहम्मद मुर्तजा मजदूरी कर अपना पेट भरते हैं। देवघर का मीना बाजार सब्जी मंडी बंद होने कारण आज उसे मजदूरी का काम नहीं मिला । मंडी को व्यवसायियों ने आपसी सहमति से बंद रखा है। ताकि पूर्ण प्रसार में एक दिन का फासला कराया जा सके। लोगों को जागरूक किया जा सके पूरी मंडी आपसी सहमति से बंद रखी गयी। लेकिन इतनी बड़ी सब्जी मंडी में मोहम्मद मुर्तजा एक चबूतरे पर 2 किलो हरा मिर्च लेकर ग्राहकों का इंतजार कर रहा था । कुछ समय तो ऐसा लगा कि सब्जी मंडी के व्यापारी इससे उलझ पड़ेंगे। क्योंकि मोहम्मद मुर्तजा ना यहां सब्जी बेचने का काम करते हैं । और ना ही आज इन्हें सब्जी बेचने की इजाजत दी गई थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मोहम्मद मुर्तजा ने कहा सवेरे से कुछ खाया नहीं । इसी सब्जी मंडी से जहां-तहां बिखरे मिर्च को इकट्ठा किया कुछ ही घंटों में 2 किलो से ज्यादा मिर्च इकट्ठा हो गया और उसे लेकर बैठ गया। इस उम्मीद में कि शायद कोई ऐसा ग्राहक भी आएगा जिसे यह पता नहीं होगा कि आज सब्जी मंडी बंद है, और वह इससे मिर्च खरीद लेगा व्यापारियों ने भी इसे सब्जी मंडी से नहीं निकाला। मोहम्मद मुर्तजा कहते हैं कि रोजाना मजदूरी कर किसी तरफ पेट चलाते थे । लेकिन आज कहीं मजदूरी नहीं मिली तो सवेरे से ही मिर्चा इकट्ठा करने में लग गए। कुछ देर बाद कुछ वैसे लोग भी आए जो सब्जी खरीदने जिन्हें मालूम नहीं था कि आज मंडी बंद है । ऐसे में इससे मिर्च तो नहीं खरीदी लेकिन नाश्ते का पैसा देकर इसकी मदद किया । लेकिन मुर्तजा भी खुदगर्जी को शर्मिंदा नहीं होने दिया । पैसे देने वाले से कहा इसके बदले मैं आपको मिर्चा दूंगा क्योंकि मैं मेनत करके रोटी खाना चाहता हूं भीख मांग कर नहीं । यह कहानी इस लाॅक डाउन जीवन जिंदा रहने और अपने दो जून की रोटी कमाने की बेहतरीन मिसाल है। हिन्दुस्थान समाचार /सुनील / सबा एकबाल-hindusthansamachar.in