रिश्तो की डोर आज भी मजबूत पर बाजार की डोर कमजोर
रिश्तो की डोर आज भी मजबूत पर बाजार की डोर कमजोर
झारखंड

रिश्तो की डोर आज भी मजबूत पर बाजार की डोर कमजोर

news

देवघर, 30 जुलाई(हि. स.) । भाई बहन के पवित्र रिश्तों का त्योहार रक्षा बंधन सोमवार यानी तीन अगस्त को है। विगत कई वर्षों से राखी का बाज़ार देवघर में काफी व्यापक हो चुका था। लेकिन कोरोना महामारी ने इसपर ब्रेक लगा दिया है । इस बार देवघर में राखी बाजार की डोर कमजोर हो गई है। श्रावणी मेला के आयोजन होने से ज्यादातर श्रद्धालु यहीं से राखियां खरीद कर जाते थे । लेकिन इस बार श्रावणी मेला पर ब्रेक लगने से मानव राखी का बाजार भी थम सा गया है । थोक विक्रेता कहते हैं कि देवघर की राखियां ना सिर्फ झारखंड के कई हिस्सों में जाती थी बल्कि बिहार के कई जिलों में इसकी सप्लाई होती थी। इसके अलावा आने वाले कांवडिये बाबा का प्रसाद समझकर यहां से राखी ले जाते थे । थोक विक्रेता का बाजार इस बार 50 फ़ीसदी कम हो गया है वहीं दूसरी तरफ फुटकर विक्रेता भी काफी परेशान हैं । फुटकर विक्रेता कहते हैं कि राखियों का डिमांड काफी कम हुआ है। देवघर में ₹5 से लेकर 500 तक की राशियां बिकती थी। लेकिन इस बार बिक्री काफी कम हो रही है उन्हें उम्मीद है कि अगले 1 से 2 दिनों में लोग आएंगे और राखियां खरीदेंगे। इन दुकानदारों की उम्मीद है कि स्थानीय लोग राखी के इस पवित्र डोर को जरूर खरीदेंगे और लॉकडाउन के बावजूद भी किसी तरह इनकी बिकवाली होगी। फिलहाल यहां राखियों की दुकानें सजी हुई है लेकिन खरीदार नहीं है । वहीं दूसरी ओर डाक विभाग में राखियां भेजने का सिलसिला भी जारी है। डाक विभाग की ओर से वाटर प्रूफ लिफाफे दिए जा रहे हैं । जिसकी कीमत ₹10 रखी गई है लोग दूर-दराज के क्षेत्रों में राखिया पोस्ट के माध्यम से भेज रहे हैं । अब पूरे बाजार की निगाहें आने वाले एक-दो दिनों पर टिकी है । जब स्थानीय लोग रक्षाबंधन के इस पर्व के लिए राखियां खरीदेंगे कुल मिलाकर श्रावणी मेला के आयोजन पर ब्रेक लगने के बाद राखियों का बाजार काफी मंदा हो गया और इस बार मुनाफा तो दूर अपनी लागत भी निकालने में पसीने छूट रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील / सबा एकबाल-hindusthansamachar.in