बाबा मंदिर में बेल पत्र प्रदर्शनी लगाकर किया गया परंपरा का निर्वाहन
बाबा मंदिर में बेल पत्र प्रदर्शनी लगाकर किया गया परंपरा का निर्वाहन
झारखंड

बाबा मंदिर में बेल पत्र प्रदर्शनी लगाकर किया गया परंपरा का निर्वाहन

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देवघर, 17 जुलाई (हि.स.) देवघर में विविधताओ से भरे पड़े कामनालिंग बाबा बैधनाथ के दरबार बाबाधाम की परम्पराएं भी निराली एवं अद्वतीय है। यहाँ की निराली परम्पराओं में एक बाबा बैधनाथ मंदिर में लगने वाली बेल पत्र प्रदर्शनी भी है। बेल पत्र जिसके बारे में कहा जाता है की इस पत्र को शिवलिंग पर चढाने से शिव बहुत खुश होते हैं। बेल पत्र प्रदर्शनी को देख कर भक्त भाव बिभोर हो जाते थे। लेकिन कोरोना की वजह से इस बेल पत्र प्रदर्शनी का रंग फीका पड़ गया है । जहां लाखों की संख्या में इस प्रदर्शनी को देखने के लिए बाबा मंदिर में प्रांगण में पैर रखने की जगह नहीं होती थी । वहां आज महज पुजारी प्रदर्शनी लगा रहे हैं, और पुजारी ही देख रहे हैं। इस बार श्रावणी मेला पर रोक है और मंदिर में प्रवेश निषेध है। इसलिए सिर्फ परंपराओं का ही निर्वहन किया जा रहा है । बाबा भोले के तीन नेत्र है और बेल पत्र के तीन पट्टी इसी का सूचक है। वर्षों से बाबा बैधनाथ के दरबार में ही बेल पत्र की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई जाती है। यह सावन मास भर चलता है। असाढ़ संक्रांति के अवसर पर बाबा मंदिर में बेल पत्र सजाने की शुरुआत की जाती है। संक्रांति के उपरांत सावन मास के प्रत्येक सोमवार को मंदिर में परदशनी लगाई जाती है। तथा समापन सावन संक्रांति को होता है। सभी पंडा बिहार-झारखण्ड के विभिन् जंगलों से बेल पत्र खोज कर लाते हैं, और उसे प्रदर्शनी के दिन चांदी या स्टील के थाल पर सजा कर बाबा मंदिर पहुचते हैं। ये सिर्फ और सिर्फ बाबा धाम देवघर में ही होता है। यहाँ पंडा समाज द्वार ये प्रदर्शनी लगाई जाती है। सभी पंडा सदस्यों द्वारा बाबा बैधनाथ पर विल्वपत्रों को अर्पित किया जाता है। इस परम्परा की शुरुआत सर्व प्रथम बम बम बाबा ब्रम्चारी जी महाराज ने विश्व कल्याण की कामना के लिए की थी। आज भी इस परम्परा का निर्वाह यहाँ के तीर्थपुरोहित करते आ रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार /सुनील /सबा एकबाल-hindusthansamachar.in