दत्तोपंत  ठेंगड़ी  ने मजदूर व किसानों को स्वदेशी चिंतन से जोड़ा: डाॅ. शिव दयाल
दत्तोपंत ठेंगड़ी ने मजदूर व किसानों को स्वदेशी चिंतन से जोड़ा: डाॅ. शिव दयाल
झारखंड

दत्तोपंत ठेंगड़ी ने मजदूर व किसानों को स्वदेशी चिंतन से जोड़ा: डाॅ. शिव दयाल

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-राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने आयोजित की गोष्ठी हजारीबाग, 22 नवंबर (हि.स.)। दत्तोपंत ठेंगड़ी ने मजदूरों व किसानों को स्वदेशी चिंतन से जोड़ने का काम किया। इन्होंने न केवल मजदूर संघ, किसान संघ, संस्कार भारती जैसे संस्थाओं को खड़ा करने का काम किया, बल्कि स्वदेशी जागरण मंच का निर्माण कर देश के आर्थिक चिंतन को स्वदेशी रूप देने का काम किया। उक्त बातें रविवार को मार्खम महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य डाॅ. शिव दयाल सिंह ने कही। वे भाग्यमणी शादी घर में अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ द्वारा आयोजित दत्तोपंत ठेंगड़ी जन शताब्दी समारोह संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ठेंगड़ी जी ने 200 से अधिक पुस्तकों के लेखन का कार्य प्रारंभ किया। उपभोक्तावादी अप संस्कार को दूर करने की बात कही। इतना ही नहीं वामपंथ को समझने के लिए रूस और चीन की भी यात्रा की। उन्होंने मजदूर व किसानों के हित के साथ साथ उद्योग व देश के हित को भी महत्वपूर्ण बताया। पूर्व सांसद महावीर लाल विश्वकर्मा ने कहा कि ठेंगड़ी जी ने शिक्षा पद्धति में भारतीय दर्शन आधारित सुधार के लिए कार्य किया। उन्होंने कहा कि केरल क्षेत्र में इनके कारण संगठन का काफी विस्तार हुआ। गंगाधर दूबे ने संघ से जुड़ने के साथ ही ठेंगड़ी जी के कई अनछुए पहलुओं की जानकारी दी। ओम प्रकाश गुप्ता ने श्री ठेंगड़ी को अनुशासनप्रिय एवं राष्ट्रीय चिंतन की दिशा मोड़ने वाला बताया। डाॅ. राज कुमार चैबे ने कहा कि लोकल के लिए वोकल का नारा ठेंगड़ी जी के प्रेरणा ही है। प्रदेश अध्यक्ष डाॅ. प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि दत्तोपंत ठेंगड़ी का विचार भारतीयता से ओतप्रोत था। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक सुधार के लिए श्री ठेंगड़ी जी ने कई संस्थाओं की रचना में सहयोग किया। विषय प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम संयोजक डाॅ. बलदेव राम ने दत्तोपंत ठेंगड़ी की जीवनी से लोगों को परिचित कराया। हिन्दुस्थान समाचार/शाद्वल/वंदना-hindusthansamachar.in