झारखंड के आंदोलनकारियों के मान-सम्मान पहचान, स्वाभिमान व अस्तित्व  खतरे में : मोर्चा
झारखंड के आंदोलनकारियों के मान-सम्मान पहचान, स्वाभिमान व अस्तित्व खतरे में : मोर्चा
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झारखंड के आंदोलनकारियों के मान-सम्मान पहचान, स्वाभिमान व अस्तित्व खतरे में : मोर्चा

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रांची, 10 सितम्बर ( हि.स.) । झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष डॉ वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि अलग राज्य होने के बाद भी झारखंड आंदोलनकारियों के मान-सम्मान, स्वाभिमान, पहचान एवं अस्तित्व खतरे में है। झारखंड आंदोलनकारी की समस्या विकराल है उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारी के पुरोधा वीर शिबू सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन आंदोलनकारी के कोख से पैदा हुए हैं यह गर्व का बात है। लेकिन झारखंड आंदोलनकारियों के मामले में गंभीरता पूर्वक जितना ध्यान देना चाहिए नहीं दिया गया है। जैसे कि उत्तरांखण्ड राज्य के आंदोलनकारियों को मान, सम्मान, इज्जत ,पहचान दिया गया। उत्तरांखण्ड झारखंड अलग राज्य के साथ ही बना है। इसलिए झारखंड सरकार को भी उत्तरांखण्ड का संकल्प मंगाकर झारखंड आंदोलनकारियों की नीति करण के कार्य को पूर्ण करते हुए तमाम तरह की सुविधाएं देनी चाहिए। सिंह गुरुवार को अंजुमन इस्लामिया कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित प्रेसवार्ता में बोल रहे थे। मौके पर चिन्हित आन्दोलनकारी राजू महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को उत्तरांखण्ड के आंदोलनकारियों के समतुल्य सम्मान व पेंशन दिया जाना चाहिए साथ ही आंदोलनकारी या आंदोलनकारियों को कंडिका देकर अलग-अलग नहीं बैठना चाहिए। आंदोलनकारी एक थे, एक हैं और एक ही रहेंगे। सभी को समान दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। जेल जाने की बाध्यता को समाप्त करते हुए सभी आंदोलनकारियों को समान रूप से चिन्हित करना चाहिए और उत्तरांखण्ड की तर्ज पर सब को सम्मान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को चाहिए कि झारखंड आंदोलनकारियों के लिए तमाम तरह की राजकीय सुविधाओं के अलावा स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा दिया जाना चाहिए। झारखंड आंदोलनकारियों को रेलवे यात्रा की सुविधा राजकीय अतिथि शालाओं में आंदोलनकारियों व उनके सहयोगियों के रहने धरने के लिए समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। झारखंड आंदोलनकारियों को शहरी क्षेत्र में न्यूनतम 5 कट्ठा व ग्रामीण अंचल में 50 कट्ठा जमीन मकान सहित सम्मान रूप में दिया जाना चाहिए, आंदोलनकारियों को मेडिक्लेम की सुविधा होनी चाहिए, आंदोलनकारियों को योग्यता के अनुसार नौकरियों में तथा उनके आश्रितों में आश्रितों को योग्यता के अनुसार नौकरियां दिया जाना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार /विनय /वंदना-hindusthansamachar.in