जर्जर सड़क की मरम्मति को लेकर युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल का दो दिवसीय भूख हड़ताल
जर्जर सड़क की मरम्मति को लेकर युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल का दो दिवसीय भूख हड़ताल
झारखंड

जर्जर सड़क की मरम्मति को लेकर युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल का दो दिवसीय भूख हड़ताल

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दुमका, 10 सितंबर (हि.स.)। युवा साहित्य अकादमी सम्मान से सम्मानित साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल ने अपनी मांगों को लेकर दो दिवसीय भूख हड़ताल किया। भूख हड़ताल गुरूवार को बासुकीनाथ-नोनीहाट मुख्य पथ पर बिशनपुर, सुखजोरा गांव के पास किया। भूख हड़ताल कर संताल परगना प्रमंडल के जर्जर सड़क की मरम्मति, सड़क दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा और अवैध बालू एवं गिट्टी की परिवहन पर रोक लगाने की मांग की है। इस अवसर पर युवा साहित्यकार नीलोत्पल मृणाल ने कहा कि वह एक लेखक है और उनका काम अलख जगाना है। लेकिन जरूरी कर्त्तव्य निर्वहन के लिए जमीन पर उतर एक नई रचना करेंगे। उन्होंने कहा कि बस यही मेरा लेखन है कि जो लिखो, उसे लड़ो भी। कलम की नोंक न टूटे और जमीन भी पकड़े रहना है। सार्वजनिक सामाजिक, राजनीतिक लड़ाई के अपने कुछ खतरे और नुकसान होते है। जिससे कोई नहीं बच सकता है। मुझे भी अगर लड़ाई लड़ना है, तो ये खतरे उठाने होंगे। पहला खतरा राजनीतिक हमले का, तो दूसरा खतरा उन माफियाओं से खतरा है, जिनके खिलाफ बिगुल फूंका रहे है। नीलोत्पल ने कहा कि मैं अपना भूख हड़ताल लेखने के जनसरोकारी को प्रतिबद्धता को समर्पित करता है। धूप में भूखे सड़क किनारे गिरे मेरे पसीने का एक-एक कतरा मेरी ओर से हिंदी लेखन पपंपरा को मेरा चढ़ाया फूल है। उसके प्रति मेरा आभार है। मुझे लेखक होने के बोध ने ही लड़ने को प्रेरित किया है। ये हिन्दी का उर्जा है। साहित्यकार नीलोत्पल ने लोगों से अपने इलाके की आवाज बनने की अपील करते हुए यह भी कहा है कि हम अपने जनप्रतिनिधि से ठगे गए वोटर है। यहां बता दें कि साहित्यकार के भूख हड़ताल की खबर सोशल मीडिया पर मिलने के बाद भूख हड़ताल का समर्थन मेंं युवाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। गुरूवार को भी साहित्यकार के भूख हड़ताल स्थल के समीप भी एक गिट्टी लदा ट्रक जर्जर सड़क पर असंतुलित होकर पलट गया। आये दिन ऐसी घटनाएं समाने आ रही है। बड़ो वाहनों के पलटने से सड़क पर चल रहे छोटे वाहन सवार की मौत का सिलसिला भी जारी है। हिन्दुस्थान समाचार/ नीरज/विनय-hindusthansamachar.in