कांग्रेस अधिवेशन ने देश की जनता को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक मजबूत आवाज उपलब्ध कराई  : रामेश्वर
कांग्रेस अधिवेशन ने देश की जनता को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक मजबूत आवाज उपलब्ध कराई : रामेश्वर
झारखंड

कांग्रेस अधिवेशन ने देश की जनता को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक मजबूत आवाज उपलब्ध कराई : रामेश्वर

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रांची, 05 नवम्बर (हि. स.)। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव, विधायक दल के नेता आलमगीर आलम, मंत्री बादल पत्रलेख, बन्ना गुप्ता, प्रवक्ता आलोक कुमार दूबे सहित अन्य नेताओं ने अखिल भारतीय कांग्रेस की ओर से जारी धरोहर श्रृंखला की 24वीं वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर देश के वर्तमान पीढ़ियों को अवगत कराने का काम किया। उरांव ने गुरुवार को राष्ट्र निर्माण की अपने महान विरासत कांग्रेस की श्रृंखला धरोहर की 24वीं वीडियो को अपने सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट को शेयर करने के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि कांग्रेस के अधिवेशनों ने स्वतंत्रता की ठोस नींव रखने से लेकर देशवासियों की एकता को बरकरार रखकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ जनांदोलन खड़ा किया। हमारे आज के एपिसोड में देश को एकता के सूत्र में पिरोने में कांग्रेसी अधिवेशनों के योगदान को निकट से दर्शाया गया है। आजादी के उस दौर में कांग्रेस के अधिवेशन महज खुले आसमान या छत के नीचे होने वाले राजनीतिक कार्यक्रम नहीं थे, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की नींव के इन्हीं अधिवेशनों ने देश की एकता को बरकरार रखा और बड़े आंदोलनों में जन भागीदारी सुनिश्चित की। यह कांग्रेस अधिवेशन ही थे, जिन्होंने देश की जनता को अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक मजबूत आवाज उपलब्ध कराई ।1921 के अहमदाबाद अधिवेशन में देशबंधु चितरंजन दास को अध्यक्ष चुना गया लेकिन उनके जेल में होने के कारण हाकीम अजमल खान ने इस अधिवेशन का नेतृत्व किया। इस अधिवेशन में असहयोग के संकल्प को पुनः मजबूती देने के साथ व्यक्तिगत सविनय अवज्ञा के आयोजन और महात्मा गांधी जी महात्मा गांधी को एकमात्र कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित किया गया। 1922 में देशबंधु चितरंजन दास की अध्यक्षता में गया में हुए अधिवेशन में बहिष्कार की नीति जारी रही और मजदूर संगठनों के गठन जैसे प्रस्ताव पारित किए गए। 1923 में मौलाना आजाद की अध्यक्षता में दिल्ली अधिवेशन में ही ऑल इंडिया खादी बोर्ड की स्थापना की गई और खादी के उत्पादन एवं इस्तेमाल को बढ़ाने तथा विदेशी कपड़ों के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया गया। इस अधिवेशन में ही सविनय अवज्ञा आंदोलन के लिए कमेटी बनाई गई। इसके अलावा पंडित नेहरू और नेताजी को शामिल करते हुए संविधान संशोधन के लिए भी एक समिति बनाई गई। इन अधिवेशनों को देखें तो पता चलता है कि कांग्रेस ने सदैव माना है कि हर वर्ग को अपनी आवाज उठाने के लिए एकजुट होने का अधिकार है। हिन्दुस्थान समाचार/कृष्ण/ वंदना-hindusthansamachar.in