आदिवासियों की दुर्दशा का जिम्मेवार है आदिवासी नेताः सूर्य सिंह बेसरा
आदिवासियों की दुर्दशा का जिम्मेवार है आदिवासी नेताः सूर्य सिंह बेसरा
झारखंड

आदिवासियों की दुर्दशा का जिम्मेवार है आदिवासी नेताः सूर्य सिंह बेसरा

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दुमका, 15 अक्टूबर (हि.स.)। आदिवासियों की दुर्दशा का जिम्मेवार आदिवासी नेता है। आदिवासी नेता को विधायक और सांसद और मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला। आदिवासी नेता को मौका ही मौका मिला और आदिवासी को धोखा ही धोखा मिला। भाजपा और झामुमों एक ही थाली के चट्ठे बठ्ठे है। उक्त बातें आजसू के संस्थापक सह जेपीपी केंद्रीय अध्यक्ष सूर्य सिंह बेसरा ने प्रेसवार्ता आयोजित कर गुरूवार को कही। उन्होंने कहा कि राज्य बने 20 सालों में 11 मुख्यमंत्री बने। जबकि 10 मुख्यमंत्री आदिवासी रहे। इसके बावजूद भी आदिवासियों की स्थिति नहीं सुधरी। किसी आदिवासी मुख्यमंत्री ने भी आदिवासियों का सूधी नहीं लेने का काम किया। उन्होंने कहा कि दुमका उप विधानसभा चुनाव से नामांकन करने पहुंचे है। उन्होंने कहा कि महाभारत के एकलव्य बनकर विधानसभा चुनाव लड़ने आया हूं। झारखंड के आंदोलकारी नेता दिसोम गुरू शिबू सोरेन है। द्रोणाचार्य शिबू सोरेन से एकलव्य बन कुछ मांगने आया हूं। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को चिन्हित करने, आदिवासी समिति का गठन करने सहित तमाम आग्रह करने आया हूं। उन्होंने आंदोलनकारियों को चिन्हित कर उनके परिवार में एक को नौकरी देने और 20 हजार पेंशन की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता की अदालत में 20 साल का हिसाब-किताब पक्ष और विपक्ष दोनों से मांगेगे। उन्होंने कहा कि 15 साल भाजपा और झामुमों और कांग्रेस ने 5 साल शासन किया। उन्होंने कहा कि उनके पास मुद्दा ही मुद्दा है। मेरे पास मुद्रा नहीं है और मतदाताओं का लुभाने के लिए भी मुद्रा नहीं है। झारखंड की राजनीति में मुद्दा नहीं मुद्रा की राजनीति चलती है। आदिवासियों का तो मुद्रा भी चलता है और मदिरा भी चलता है। उन्होंने दुमका की जनता से अपील करते हुए कहा कि वह राजनीति करने नहीं, दुमका की जनता का अवाज बनने आये हैं। पक्ष और विपक्ष दोनों को जनता के कटघरे में खड़ा करने आया हूं। उन्होंने कहा कि झारखंड वह राज्य है जहां खोजेंगे वहां भ्रष्टाचार, जहां खोदोगे वहीं भ्रष्टाचार है। खनिजो से भरा झारखंड को आदिवासी नेता ने लूटने का काम किया। सोने के कटोरे में झारखंड की जनता भीख मांगने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में 8 से 9 विश्ववविद्यालय है। लेकिन एक भी नेता और मंत्री स्नातक पास नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरी मांग है कि चुनाव में उतरने के लिए उम्मीदवार की योग्यता कम से कम स्नातक होना अनिवार्य हो। इस अवसर पर केंद्रीय महासचिव अनिल मरांडी, प्रेम किस्कू आदि उपस्थित थे। हिन्दुस्थान समाचार/ नीरज/विनय-hindusthansamachar.in