आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका सराहनीय: कमांडेंट
आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका सराहनीय: कमांडेंट
झारखंड

आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका सराहनीय: कमांडेंट

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खूंटी, 27 जुलाई ( हि.स.)। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ) के स्थापना दिवस के मौके पर सोमवार को सीआरपीएफ 94 बटालियन द्वारा कैंप परिसर में शहीद जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गयी। शहीदों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए बटालियन के कमांडेंट ब्रजेश सिंह ने सीआरपीएफ के इतिहास पर प्रकाश डाला और इसके जाबांजों की वीरता को नमन किया। कमांडेंट ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की स्थापना 27 जुलाई 1939 को क्राॅउन रिप्रेजेंटेटिव पुलिस के रूप में हुई थी। उन्होंने कहा कि भारत के हाॅट स्पिंग्र (लद्दाख) पर 21 अक्टूबर 1959 को चीनी हमले को सीआरपीएफ ने नाकाम कर दिया। इसमें हमारे दस जवान वीर गति को प्राप्त हुए थे। सीआरपीएफ द्वारा हर वर्ष 21 अक्टूबर को स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। कमांडेंट ने कहा कि 1962 के चीनी हमले के दौरानभी सीआरपीएफ ने भारतीय सेना की भरपूर मदद की थी। 1965 और 1871 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में भी सीआरपीएफ की बड़ी भूमिका थी। कमांडेंट ने कहा कि आंतरिक सुरक्षा में सीआरपीएफ की भूमिका सराहनीय है। मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी जेएम कंडुलना, द्वितीय कमान अधिकारी अमित सिन्हा, उप कमांडेंट परमोज कुमार आर्य और राणा प्रताप यादव सहित अन्य अधिकारियों और जवानों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। सीआरपीएफ की देश में हैं 246 बटालियन सीआरपीएफ देश का एक विशाल अर्द्धसैनिक बल के रूप में विकसित हो चुका है। इसमें 246 बटालियन है। एक बटालियन में एक हजार जवान होते हैं। इनमें 208 कार्यकारी बटालियन, छह महिला बटालियन, 15 रैपिड एक्शन फोर्स(दंगा विरोधी), 10 कोबरा बटालियन(विशेष नक्सल विरोधी अभियान) हैं। इसकी पांच सिग्नल बटालियन भी है। 29 जवानों को अति उत्कृष्ट और उत्कृष्ट सेवा पदक सीआरपीएफ 94 बटालियन के 29 जवानों को उनके विशेष योगदान के लिए अति उत्कृष्ट और उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया। पदक पाने वाले जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। सेवा पदक प्रदान करते हुए कमांडेंट ब्रजेश सिंह व अन्य अधिकारियों ने जवानों की वीरता की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। हिन्दुस्थान समाचार/अनिल/वंदना-hindusthansamachar.in