अंतर्राष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस पर करो  संकल्प, कोरोना को है भगाना, तो हाथ को है धोना
अंतर्राष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस पर करो संकल्प, कोरोना को है भगाना, तो हाथ को है धोना
झारखंड

अंतर्राष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस पर करो संकल्प, कोरोना को है भगाना, तो हाथ को है धोना

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रांची, 14अक्टूबर ( हि.स.) । कभी-कभी छोटी लगने वाली बातों का ख्याल न रखे जाने पर उनका दुष्प्रभाव काफी लम्बा और गहरा हो सकता है। वर्त्तमान में विश्व भर में अपना पांव पसारी हुई महामारी कोविड-19 का भयावह असर जग-जाहिर है, जिसका प्रभावी ईलाज अभी तक नहीं मिल पाया है। लेकिन साधारण बातों का ध्यान रख कर जैसे की अपने हाथों को नियमित रूप से साबुन या सेनिटीज़र की मदद से स्वच्छ रखने मात्र से खुद को और अपने चाहने वालों को महामारी की चपेट में आने से बचाया जा सकता है। वहीं, सिर्फ हाथों को साफ रखने से ही कई संक्रमण को रोका जा सकता है। हाथों की स्वच्छता की महत्ता को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष 15 अक्टूबर को ‘अंतराष्ट्रीय हाथ धुलाई दिवस ‘ के रूप में मनाया जाता है। इस अभियान का मुख्य लक्ष्य यह बताना है कि हाथों को अच्छी तरह से धोना सबसे प्रभावी कार्यों में से एक है। रोजाना नियमित रूप से सही तरीके से अपने हाथ धोने से आप बहुत सी बीमारियों से संक्रमित होने से रोक सकते हैं और इनमें कोविड-19 भी शामिल है। राज्य के हर हिस्से हर तबके तक हांथों की स्वच्छता की महत्व को समझने वाटर सप्लाई एंड सैनिटेशन कोलैबोरेटिव काउंसिल (डब्ल्यू एस एस सी सी )प्रयास से विश्व हाथ स्वच्छता दिवस पर रांची जिले के ओरमांझी ब्लॉक अंतर्गत 3 गांवों में हाथ-धुलाई अभियान चलाया गया। क्रमशः 12 अक्टूबर को अरा गाँव में, 13 अक्टूबर को कुकुई तथा 14 अक्टूबर को बारीडीह में हाथों की स्वच्छता पर आधारित कई कार्यक्रम आयोजित किये गए। गांव मोहल्लों में प्रायः सार्वजानिक रूप से हाथ धोने के लिए पानी की व्यवस्था काम पायी जाती है। डब्ल्यूएसएससीसी की राज्य समन्वयिका ईशा सिंह, राज्य एवं जिला के विशाल आनंद ने बुधवार को बताया कि अपने अभियान में कुछ नवीनता लाते हुए नल-युक्त मिटटी के घड़ों में चित्रकारी प्रतियोगिता आयोजित कर बच्चों में हाथ धोने की अच्छी आदतों को शामिल करने की बात भी बताई। साथ ही साथ इन घड़ों को सार्वजानिक स्थलों जैसे मंदिर,मस्जिदों, सामूहिक-बैठकी की जगहों आदि पर रखवा कर एक पंत से दो काज किया। दूसरी ओर एक अनोखे खेल में अपने दैनिक जीवन के विभिन क्रिया कलापों के करने से पहले, दौरान एवं सम्पत कर लेने के पश्चात हाथों की स्वच्छता को जोड़ कर बच्चों में हीं नहीं बल्कि बड़े- बुड्ढों में भी उत्सुकता के बदल जगा हाथों की स्वच्छता की महत्ता पर पूरा धयान आकर्षित किया। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण रिपोर्ट की 76वीं संस्करण के अनुसार झारखण्ड राज्य में मात्र 35.8 प्रतिशत लोग ही खाने से पहले साबुन या डिटर्जेंट से अपना हाथ धोते है। ग्रामीण क्षेत्र खाने से पहले साबुन या डिटर्जेंट से अपना हाथ धोने में एक कदम ओर पीछे रह केवल 25.3 प्रतिशत पर हीं सिमट कर रह जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में हाथों से फैलती संक्रमित बीमारियों पर पूरी तरह से शिकंजा तभी कसा जा सकता है, जब बच्चे और बड़े-बुड्ढों में हाथ की स्वच्छता के सकारात्मक प्रभाव को सरलता पूर्वक बताया तथा समझाया जा सके। हिंदुस्थान समाचार /विनय / वंदना-hindusthansamachar.in