शिवसेना ने उठाई जम्मू को कश्मीर से अलग दर्जा देने की मांग

शिवसेना ने उठाई जम्मू को कश्मीर से अलग दर्जा देने की मांग
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जम्मू 11 जून (हि.स.)। कश्मीर की गलतियों और भेदभाव को अब और स्वीकार नहीं किया जाएगा अब समय आ चुका हैं कि जम्मू अपना भविष्य खुद तय करें यह कहना है शिवसेना बाला साहेब ठाकरे जम्मू.कश्मीर इकाई के अध्यक्ष मनीश साहनी का। शिवसेना नेताओं ने शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष मनीश साहनी के नेतृत्व में जम्मू को कश्मीर से अलग करने की मांग को लेकर जम्मू प्रैस क्लब परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। मनीश साहनी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जम्मू का अलग दर्जा, विधानसभा और वैधानिक अधिकारों की मांग की है। साहनी ने कहा कि जम्मू को यूटी बनना मंजूर है मगर कश्मीर के साथ बने रहना कतई मंजूर नहीं। उन्होंने कहा कि पिछले 73 सालों से जम्मू भेदभाव के साथ कश्मीरी नेताओं की गलतियों का खामियाजा भी भुगत रहा है जो आज भी जारी है। जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा छीने जाने का मुख्य कारण भी कश्मीर में सक्रीय आंतकवाद और कश्मीरी नेताओं की विवादास्पद सोच रही है। साहनी ने कश्मीरी नेताओं को मौकापरस्त बताते हुए कहा कि आज भी कश्मीर के नेता धारा 370 की बहाली और दुश्मन देश पाकिस्तान एव चीन का राग अलापने का कोई मौका नहीं छोड़ते। भारतीय संविधान और निशान के लागू होने का विरोध जताने वालों के साथ तो जम्मू कतई नहीं बने रहना चाहता । साहनी ने कहा कि केऐएस, केपीएस, शेर.ए.कश्मीर आदि अवार्ड से जे हमेशा गायब था। महाराजा हरि सिंह के जन्मदिवस पर अवकाश आज तक नहीं मिल पाया । जम्मू एम्स को लेकर भी हमें सड़कों पर उतरना पड़ा था। आज भी हिन्दू नेताओं को कश्मीर में जाने से रोका जाता है। साहनी ने कहा कि 1989.90 में आंतकवादी धटनाओ के कारण पलायन के लिए मजबूर हुए हिन्दू कश्मीरी पंडितो की आज तक घर वापसी नहीं हो सकी है। साहनी ने मौजूदा एवं पूर्व केन्द्र सरकारों पर भी कश्मीर केन्द्रित होने का आरोप लगाया । साहनी ने कहा कि आज भी जम्मू कश्मीर को लेकर मुख्य फैसले पर जम्मू को नजरंदाज कर कश्मीर के नेताओं के साथ बैठकों को महत्व दिया जाता है। साहनी ने कहा की हमारे सब्र का बांध टूट चुका है और अब हमारे पास कश्मीर से अलग होने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं है। आज भी केन्द्र सरकार द्वारा जारी उघयोगिक, विकास के तमाम राहत पैकेज, आक्सीजन प्लांट, स्वास्थ सुविधाएं, केसर प्रोत्साहन योजना, पर्यटन विकास से लेकर नौकरियां में जम्मू के साथ बंदर बांट हो रही है। परिसीमन आयोग का सन् 2011 के अधार पर जनगणना से भी जम्मू को निराशा के सिवा कुछ हाथ लगने वाला नहीं है। साहनी ने कहा कि समय आ चुका है कि हमे अपने भविष्य पहचान एवं सांस्कृतिक की सुरक्षा के लिए एकजुटता के साथ अलग जम्मू की आवाज बुलंद करें । हिन्दुस्थान समाचार/मोनिका/बलवान