जम्मू व कश्मीर में गुर्जरों-बक्करवालों के लिए हो अलग राज्य: शमशेर हकला पुंछी

जम्मू व कश्मीर में गुर्जरों-बक्करवालों के लिए हो अलग राज्य: शमशेर हकला पुंछी
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जम्मू, 20 जून (हि.स.)। प्रमुख मुस्लिम गुर्जर नेता और जम्मू-कश्मीर के बुद्धिजीवी शमशेर हकला पुंछी ने रविवार को कहा कि गुर्जर बकरवालों की समस्याएं और जरूरतें जम्मू-कश्मीर के अन्य समुदायों से काफी अलग हैं। गुर्जर बकरवाल समुदाय की भाषा और संस्कृति भी इस जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के अन्य समुदायों की तुलना में अलग है और यही कारण है कि इस समुदाय की अपनी विशिष्ट स्थिति है। गुर्जर बकरवाल समुदाय और ऐसे अन्य समुदाय की एक अलग पहचान है। उन्होंने कहा कि गुज्जर बकरवाल समुदाय ज्यादातर जंगलों के पास दूर-दराज के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहता है। इसके अलावा भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर जम्मू और कश्मीर में गुज्जर बकरवाल समुदाय के अधिकांश आबादी निवास करती है। जिन क्षेत्रों में यह आबादी निवास करती है वहां पर सड़क संचार, बिजली, जलापूर्ति योजनाओं, चिकित्सा सुविधाओं और शिक्षा जैसी सुविधाओं का अभाव है जिसने गुर्जर बक्करवाल समुदाय को बहुत कठिनाइयों और परेशानियों में डाल दिया है। जम्मू-कश्मीर का गुर्जर बक्करवाल समुदाय इस्लाम धर्म से ताल्लुक रखता है और जम्मू-कश्मीर में हमारी लाखों की आबादी है। जम्मू-कश्मीर के गुर्जर बकरवाल अभी भी सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से पिछड़े हैं और पिछड़ रहे हैं। शमशेर हकला पुंछी प्रमुख गुर्जर नेता और जम्मू-कश्मीर के एक बुद्धिजीवी ने भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि भारत के संविधान के तहत जम्मू-कश्मीर में गुर्जरों और बकरवालों के लिए ‘गुर्जरस्थान’ नामक एक अलग राज्य बनाया जाये ताकि उन्हें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक रूप से विकसित किया जा सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों के साथ कथित भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि अगर गुर्जर बकरवाल समुदाय के साथ न्याय नहीं किया जाता है, तो समुदाय के पास अलग गुर्जरस्थान राज्य की मांग करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। शमशेर हकला पुंछी ने कहा कि 19 अप्रैल 1991 को भारत सरकार ने जम्मू और कश्मीर राज्य के गुर्जर बकरवाल समुदाय के पिछड़ेपन को मान्यता देते हुए उन्हें अनुसूचित जनजाति घोषित किया था। अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने के 30 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, जम्मू और कश्मीर सरकार जम्मू-कश्मीर के गुर्जर बकरवाल समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का पूरा लाभ देने के लिए इसे मूल रूप से लागू नहीं कर सकी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर राज्य के गुर्जर बकरवाल समुदाय के विकास के लिए किए गए सभी प्रयासों को पूर्ववर्ती राज्य सरकारों द्वारा जानबूझकर पिछले कई दशकों से बाधित किया गया है जिसके परिणामस्वरूप उनका राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक पिछड़ापन बना हुआ है। शमशेर हकला पुंछी ने कहा कि उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और जम्मू-कश्मीर के गुर्जर और बकरवाल समुदाय के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करने के लिए, भारत के संविधान के तहत ‘गुर्जरस्थान’ के नाम से एक अलग राज्य बनाया जाना चाहिए। तभी उनका आर्थिक, शैक्षिक, राजनीतिक और सामाजिक पिछड़ापन दूर होगा और गुर्जर बकरवाल के इस समुदाय को न्याय मिलेगा और यही वह लक्ष्य है जिसकी ओर इस समुदाय की निगाहें टिकी हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान

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