जे.के.एस.एस.बी ने परीक्षा शुल्क के नाम पर गत 5 वर्ष में जमा किए 77 करोड रूपए: मंगोत्रा

जे.के.एस.एस.बी ने परीक्षा शुल्क के नाम पर गत 5 वर्ष में जमा किए 77 करोड रूपए: मंगोत्रा
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उधमपुर, 7 जून (हि.स.)। आर.टी.आई एक्टिविस्ट द्वारा आर.टी.आई के माध्यम से यह जानकारी हासिल की गई कि जे.के.एस.एस.बी ने 5 सालों में 77 करोड़ रूपए कमाए जबकि पढ़े-लिखे युवाओं के साक्षात्कार नहीं करवा कर उनके साथ धोखा किया गया। उक्त बातें कांग्रेस वरिष्ठ नेता सुमित मंगोत्रा ने एक प्रैस वार्ता के दौरान कहीं। मंगोत्रा ने जानकारी देते हुए कहा कि आरटीआई से आरटीआई एक्टिविस्ट को जो जानकारी मिली उसमें जे.के.एस.एस.बी द्वारा नान-गैजेटिड नौकरियों के लिए 350 रूपए फॉर्म की फीस और गैजेटिड के लिए 1000 रूपए फॉर्म की फीस रखी थी और नौकरी के लिए इच्छुक आवेदकों से परीक्षा शुल्क के नाम पर गत 5 सालों में जे.के.एस.एस.बी ने करोड़ों रुपए इकट्ठे किए। यह राशि विभिन्न सरकारी विभागों में रिक्त पड़े हुए पदों पर किए जाने वाली चयन परीक्षा को लेकर ली गई। उनका कहना था कि जे.के.एस.एस.बी ने तकरीबन 300 परीक्षार्थियों का चयन करना था जिसमें 1 लाख युवाओं ने आवेदन किया लेकिन परीक्षाएं नहीं हुई। आरटीआई के खुलासे से यह जानकारी मिली कि महाप्रशासनिक विभाग ने इन सभी पोस्टों के लिए विज्ञापन को रद्द कर दिया और इसलिए परीक्षा नहीं हुई। मगोत्रा ने कहा कि बड़े दुःख की बात है कि जम्मू कश्मीर के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं ने नौकरी की आस में फॉर्म भरे थे और इनमें से कई युवा ऐसे थे जोकि फॉर्म की फीस भी बड़ी मुश्किल से इकट्ठी की होगी लेकिन इन युवाओं की भावनाओं से खिलवाड़ कर इनसे पैसा ठगने का काम किया गया। अगर नौकरियां नहीं देनी थी, परीक्षाएं नहीं लेनी थी, तो यह पैसा इकट्ठा क्यों किया गया ? यह जनता के सामने लाया जाए। मगोत्रा ने तमाम जम्मू कश्मीर के युवाओं से अपील करते हुए कहा जैसा कि पिछले वर्ष सरकार द्वारा दूसरे राज्यों के लोगों के लिए कुछ पोस्ट निकाली गई थीं जिनका सोशल मीडिया के जरिए जम्मू कश्मीर के युवाओं ने काफी विरोध किया था, उनके विरोध के चलते सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। उसी तरह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए इस धोखाधड़ी के खिलाफ सभी युवा अपनी आबाज जम्मू कश्मीर प्रशासन तक पहुंचाएं। कांग्रेस नेता ने उपराज्यपाल से मांग करते हुए कहा कि जिन पढ़े-लिखे नौजवानों ने इन 5 सालों में आवेदन दाखिल किए थे और फीस जमा करवाई थी उन सभी को फिर से विज्ञापन निकालकर परीक्षाओं का मौका दिया जाए और ऐसा कानून बनाया जाए, जिसमें भविष्य में युवाओं से भद्दा मजाक ना हो। हिन्दुस्थान समाचार/रमेश/बलवान