स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते गोविंदसर वासियों ने किया प्रदर्शन, प्राइमरी हेल्थ सेंटर की इमारत मात्र सफेद हाथी

स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते गोविंदसर वासियों ने किया प्रदर्शन, प्राइमरी हेल्थ सेंटर की इमारत मात्र सफेद हाथी
due-to-the-lack-of-health-facilities-the-residents-of-govindsar-demonstrated-the-building-of-the-primary-health-center-was-only-a-white-elephant

कठुआ, 20 जून (हि.स.)। स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते गोविंदसर वासियों ने स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी शशी कुमार का कहना था कि जिला कठुआ सचिवालय से मात्र 4 किलोमीटर की दूरी पर गोविंदसर पंचायत है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं। लेकिन प्राइमरी हेल्थ सेंटर की इमारत मात्र सफेद हाथी बनकर रह गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पिछले 5 साल से प्राइमरी हेल्थ सेंटर गोविंदसर पंचायत में कोई भी डॉक्टर नहीं है, इसलिए 5 साल से एम.ओ का पद रिक्त पड़ा हुआ है, जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा किसी भी डाॅक्टर या स्वास्थ्य कर्मचार को पीएचसी गोविंदसर में तैनात नहीं किया गया। जिसकी वजह से प्राइमरी हेल्थ सेंटर की इमारत मात्र साइन बोर्ड़ तक ही सीमित रह गई है। गांववासियों का कहना था कि महामारी के चलते लोग जिला अस्पतालों में जाने का परहेज करते हैं, इस महामारी के दौरान इलाज के लिए पीएचसी ही एकमात्र सहारा होता है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते गोविंदसर पंचायत के स्थानीय लोग घरों में छाटी मोटी बिमारियों से ग्रस्त हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन गोविंदसर हेल्थ सेंटर को देखकर सरकार के दावे खोखले सिद्ध हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि आए दिन खबरें सुनने को मिलती हैं कि कश्मीर में 500 बेड का अस्पताल खोला गया है, जम्मू में भी अस्पताल खोला गया, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं आज भी शुन्य हैं। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा गांव गांव में आम जनता को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्राइमरी हेल्थ सेंटर तो खोले गए हैं, लेकिन उनमें ना डाॅक्टर है और ना ही स्टाफ है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से निपटने के लिए आज के समय में वैक्सीन ही एकमात्र सहारा है, इसी के मध्यनजर पंचायत गोविंदसर के स्वास्थ्य केंद्र में वैक्सिंन के लिए कैंप लगाया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से उस कैंप को भी बंद कर दिया गया। उन्होंने जिला प्रशासन और यूटी सरकार से मांग की है कि अगर सरकार द्वारा प्राइमरी हेल्थ सेंटर पंचायतों में खोले गए हैं, तो वहां पर डॉक्टर, स्टाफ सहित सुविधाएं प्रदान की जाए, ताकि इस महामारी में स्थानीय लोग छोटी मोटी बिमारी का इलाज गांव में बने स्वास्थ्य केंद्र में ही करवा सकें। हिन्दुस्थान/समाचार/सचिन/बलवान

अन्य खबरें

No stories found.