डोगरा शासक ने दबे कुचले लोगों के लिए खोले थे मंदिरों के दरवाजे: बलबीर

डोगरा शासक ने दबे कुचले लोगों के लिए खोले थे मंदिरों के दरवाजे: बलबीर
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जम्मू, 26 अप्रैल (हि.स.)। प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता बलबीर राम रतन ने सोमवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर रियासत के पूर्व शासक महाराजा हरि सिंह को हमेशा समाज से अस्पृश्यता के कलंक को मिटाने में उनके योगदान के लिए एक महान समाज सुधारक के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने महाराज हरि सिंह को एक ऐसा व्यक्तित्व बताया जो अस्पृश्यता के खिलाफ थे और जिन्होंने दबू कुचले लोगों के लिए अपने अधिकार क्षेत्र में मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थानों के दरवाजे खोले थे। उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता उन्मूलन के कार्य को पूरा करने के लिए महाराजा हरि सिंह ने महान दूरदर्शी पं. प्रेमनाथ डोगरा की सेवाएं भी लीं। उन्होंने अपने प्रशासनिक कौशल से समाज के विभिन्न वर्गों के प्रभावशाली लोगों को, विशेषकर उन लोगों को जो अस्पृश्यता के समर्थक थे और जो इस सामाजिक कुरीति के खिलाफ थे, को विश्वास में लेकर इस जटिल मुद्दे का शांतिपूर्ण तरीके से हल निकाला। बलबीर ने कहा कि लंदन में 1930 में गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के दौरान, महाराजा डॉ. बी.आर अम्बेडकर को सुनकर दंग रह गए, जिन्होंने भारत में दबू कुचले लोगों के साथ किए जाने वाले व्यवहार के बारे में सुनाया और उनके लिए न्याय की मांग की। इसने महाराजा को अपने राज्य से अस्पृश्यता को दूर करने और अन्य लोगों के रूप में सम्मानीय नागरिकों के रूप में उनके साथ व्यवहार करने का दृढ़ कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। बलबीर राम रतन ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और अन्य संगठन इस महान डोगरा शासक को उनकी पुण्यतिथि पर याद कर रहे हैं, जो उन्हें सम्मान देना अच्छा है लेकिन इसे किसी प्रतीकात्मक घटना तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए लेकिन इस अवसर का उपयोग जनता के साथ उनके क्रांतिकारी और सुधारवादी फैसलों को साझा करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान