कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बुढ्ढा अमरनाथ पहुंची छड़ी मुबारक
कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बुढ्ढा अमरनाथ पहुंची छड़ी मुबारक
जम्मू-कश्मीर

कड़ी सुरक्षा के बीच बाबा बुढ्ढा अमरनाथ पहुंची छड़ी मुबारक

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पुंछ, 01 अगस्त (हि.स.) पुंछ जिले में स्थित बाबा बुढ्ढा अमरनाथ जी में शनिवार को छड़ी मुबारक यात्रा कड़ी सुरक्षा के बीच सीमित साधुओं के साथ पहुंची। जहां पर पूरी श्रद्धा भाव के साथ बाबा बुढ्ढा अमरनाथ जी की पूजा अर्चना तथा अनुष्ठान किए गए। इस वर्ष कोविड-19 के चलते किसी भी यात्रा को अनुमति नहीं दी गई है। शनिवार सुबह ‘बम बम बोले, हर हर महादेव और जय बाबा बुढ्ढा अमरनाथ के जयगोश के साथ दशनामी अखाड़ा मे छड़ी मुबारक के साथ इस यात्रा की शुरूआत हुई। वार्षिक छड़ी मुबारक यात्रा श्री दशनामी अखाड़ा मंदिर में पुंछ से शुरू हुई जहाँ स्वामी विश्वनाथानंद सरस्वती जी अपने हाथों में छड़ी मुबारक धारण करते हुए कुछ साधुओं के साथ छड़ी पुजन किया। सह मुबारक अमरनाथ जी मंदिर की ओर सुरक्षा वाहनों की एक टुकड़ी के साथ केवल दो संतों व स्वामी जी द्वारा छड़ी मुबारक ले जाया गया। यात्रा में डीआईजी राजौरी विवेक गुप्ता, डीडीसी पुंछ राहुल यादव, एसएसपी पुंछ रमेश कुमार अग्रवाल ने भाग लिया। सबसे पहले पुलिस चौकी से छड़ी मुबारक को गॉड आफ आनर का सम्मान दिया गया, जिसके बाद स्वामी जी ने छड़ी मुबारक (द स्केयर मेस) के साथ पुंछ जिले के मंडी तहसील के राजपुरा गाँव में स्थित श्री बुढ्ढा अमरनाथ जी मंदिर की ओर प्रस्थान किया। वहीं इसके बाद यह यात्रा राजपुरा पहुंची जहां स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने इसकी अगवानी की। अंतत तीर्थयात्रियों के साथ छड़ी मुबारक बुढ्ढा अमरनाथ जी मंदिर पहुंचे जहां मंदिर के गेट पर एक बार फिर से पुलिस अभिरक्षा द्वारा छड़ी मुबारक को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और फिर पवित्र छड़ी ले जाने वाले स्वामी जी को मुख्य स्थान के बीच ले जाया गया। इस बीच भगवान शिव की आरती के बाद पारंपरिक अनुष्ठान किया गया। स्वामी विश्वतमानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि इस वर्ष कोविड-19 महामारी की वजह से छड़ी मुबारक को आज सुबह निकाला गया, ताकि स्थानीय लोगों को वार्षिक छ़डी यात्रा में भाग लेने के लिए प्रतिबंधित किया जा सके। उन्होंने आगे कहा कि सरकारी प्रतिबंधों के कारण कुछ संतों ने छड़ी पूजन में भाग लिया और छड़ी मुबारक के साथ सीमित लोग शामिल हुए। जिला प्रशासन ने बाबा बुढ्ढा अमरनाथ जी की प्रबंधन समिति के साथ मिलकर यत्रियों के आरामदायक रहने की व्यवस्था की। ऐसा कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान शिव ने पार्वती जी को अमरनाथ की कथा सुनाना शुरू किया था जिसका अंत कश्मीर में अमरनाथ जी में हुआ था, इसीलिए इस मंदिर को स्वामी बुढ्ढा अमरनाथ जी के नाम से जाना जाता है। यह माना जाता है कि बुढ्ढा अमरनाथ जी एक भूमिगत सुरंग के माध्यम से कश्मीर में अमरनाथ जी के मंदिर से जुड़े हैं। हिन्दुस्थान समाचार/कुलदीप/बलवान-hindusthansamachar.in