1912 से शुरु हुई थी बसोहली में ऐतिहासकि रामलीला, देश में नम्बर 1 का खिताव मिल चुका है
1912 से शुरु हुई थी बसोहली में ऐतिहासकि रामलीला, देश में नम्बर 1 का खिताव मिल चुका है
जम्मू-कश्मीर

1912 से शुरु हुई थी बसोहली में ऐतिहासकि रामलीला, देश में नम्बर 1 का खिताव मिल चुका है

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कठुआ, 18 अक्तूबर (हि.स.)। जिला प्रशासन द्वारा जारी की गई एसओपी को ध्यान में रखते हुए बसोहली में ऐतिहासिक रामलीला जारी है। कोरोना के चलते रामलीला को लेकर तहसील प्रशासन व रामलीला कमेटी ने युद्वस्तर पर तैयारियो कर रखी है। 1912 से शुरु हुई बसोहली रामलीला को देश में नम्बर 1 का खिताव भी मिल चुका है। बीते वर्ष इसे नंबर बनाने के लिए स्टार एबीपी न्यूज ने देश में हो रहे रामलीला मंचन के सभी पहलुओं सर्वे कराया, जिसमें बसोहली को सबसे ज्यादा अंक मिले और इसे नंबर बन घोषित किया गया था। वहीं बसोहली रामलीला सबसे अलग छवि बनाये हुए है। बसोहली राम लीला का मंचन बिना किसी पर्दे और बिना किसी रुकावट के रात नौ बजे एक बार शुरू होती है तो संपन्न होने पर ही समाप्त होती है। इसके मंचन के लिए दो दरबार लगाए जाते हैं। इसके अलावा खुले में साधु तपस्या करते दिखाई देते हैं। पंचवटी की कुटिया, अशोक वाटिका, किशकंधा पर्वत आदि खुले में बनाए गए होते हैं। महिलाओं का इस रामलीला मैदान में प्रवेश वर्जित है। मैदान में केवल सात्विक भोजन करने वाले ही जा सकते हैं। बसोहली की रामलीला का मंचन 105 साल से एक ही प्रकार से हो रहा है। इसमें उन्हीं संवादों का प्रयोग हो रहा है जो 1912 में किया गया है। रामलीला को सफल बनाने में कस्बे की रामलीला क्लब का विशेष सहयोग है जिसके सदस्य निर्देशक समाजसेवी, एनसीसी वालेंटियर पूरा सहयोग मंचन में देते हैं। इसमें आधुनिक तकनीक का प्रभाव देखने को आया जिसमें बेहतर साउंड सिस्टम, लाइट सिस्टम देखने को मिल रहा है। रामलीला मैदान को चारों तरफ से सजाया गया है। दरअसल बसोहली की रामलीला पूरे राज्य भर में ऐतिहासिक मानी जाती है। इसे देखने के लिए राज्य के लागों के अलावा पंजाब हिमाचल के भी लोग आते हैं। लेकिन इस वर्ष कोरोना के चलते पड़ोसी राज्य के लोग रामलीला को देखने नहीं आ रहे हैं। हिन्दुस्थान/समाचार/सचिन/बलवान-hindusthansamachar.in