प्रतिस्पर्धी मुख्यधारा की राजनीति ही चरमपंथी हिंसा की एकमात्र प्रतिकारक: हर्ष
प्रतिस्पर्धी मुख्यधारा की राजनीति ही चरमपंथी हिंसा की एकमात्र प्रतिकारक: हर्ष
जम्मू-कश्मीर

प्रतिस्पर्धी मुख्यधारा की राजनीति ही चरमपंथी हिंसा की एकमात्र प्रतिकारक: हर्ष

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जम्मू, 02 अगस्त (हि.स.)। जम्मू कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के चेयरमैन हर्ष देव सिंह ने रविवार को कहा कि जम्मू व कश्मीर में एक वैध निर्वाचित सरकार ही पंगु शासन के लिए रामबाण साबित हो सकती है। पूर्व मंत्री ने बिना किसी देरी के जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का आह्वान किया। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि परिसीमन प्रक्रिया में जानबूझ कर विलम्ब किया जा रहा है क्योंकि केंद्र की जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बहाल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है जिसे पिछले साल केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) में बदल दिया गया था। उन्होंने कहा कि केंद्र को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि प्रतिस्पर्धी मुख्यधारा की राजनीति अत्यधिक हिंसा की प्रतिकारक हो सकती है। हर्ष देव सिंह ने कहा कि जम्मू व कश्मीर में नौकरशाही शासन भ्रष्टाचार के चलते पूरी तरह विफल साबित हुआ है और सभी विकास कार्य ठप होकर रह गए हैं। लोगों की सत्ता के गलियारों तक कोई पहुंच नहीं है। आम आदमी की शिकायतों को सुनने वाला कोई नहीं है। नौकरशाहों और सलाहकारों के पास असीम शक्तियां और अधिकार होने से उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। वे न केवल लोगों और उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत से परहेज करते हैं बल्कि टेलीफोन से और संचार के माध्यम से जमीनी वास्तविकताओं की जानकारी हासिल करने से भी इंकार कर देते हैं। आतंकवाद संबंधी गतिविधियों में वृद्धि के साथ सामान्य विकास परिदृश्य दिन-प्रतिदिन बिगड़ रहा था। सरकार का जनता से संपर्क टूट गया है और इस तरह से आम आदमी की परेशानियां बढ़ती जा रहीं हैं जो अपने को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं ओर अपने को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। न्याय के लिए समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाला सत्ता के गलियारे में कोई नहीं होने के कारण लोग परेशान है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती राज्य तेजी से अशांति की एक कड़ी की ओर परिवर्तित हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि जेएंडके में एक बार फिर से आतंकवाद पुनर्जीवित हो रहा है और आगे कहा कि बाहरी नौकरशाहों को सत्ता की बागडोर सौंपना जम्मू-कश्मीर के सामने आने वाली अजीबोगरीब समस्याओं का समाधान नहीं है। वर्तमान चुनौतियों को केवल एक चुनी हुई सरकार द्वारा प्रभावी रूप से निपटा जा सकता है जिनको लोगों का विश्वास और जनादेश प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद संबंधित घटनाओं में वृद्धि चिंता का विषय है। यद्यपि हमारे सुरक्षा बल पाक प्रायोजित आतंकवादियों को प्रभावी ढंग से जवाब दे रहे हैं, लेकिन राजनीतिक कार्यपालिका की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गतिविधियों से सभी प्रतिबंध हटाकर राजनीतिक दलों को लोकतांत्रिक सरकार का मार्ग प्रशस्त करके उचित स्थान दिए जाने की आवश्यकता है। सरकार को अपने राजनीतिक विरोधियों के उत्पीड़न को बंद करना होगा। केंद्र को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि प्रतिस्पर्धी मुख्यधारा की राजनीति अत्यधिक हिंसा की प्रतिकारक हो सकती है। हम किसी भी कीमत पर और बहुमूल्य जीवन को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान-hindusthansamachar.in