डोमिसाइल कानून बनने के बाद भी जम्मू की बेटियों को नहीं मिला इंसाफ: एनएसएफ
डोमिसाइल कानून बनने के बाद भी जम्मू की बेटियों को नहीं मिला इंसाफ: एनएसएफ
जम्मू-कश्मीर

डोमिसाइल कानून बनने के बाद भी जम्मू की बेटियों को नहीं मिला इंसाफ: एनएसएफ

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जम्म, 10 सितंबर (हि.स.)। नेशनल सेकुलर फोरम के प्रधान डॉ. विकास शर्मा ने गुरूवार को कहा कि जम्मू कश्मीर में डोमिसाइल कानून बन जाने के बाद भी जम्मू की बेटियों-महिलाओं को इंसाफ नहीं मिल पाया है। गांधीनगर जम्मू में अपने कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. विकास शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया और साथ में ही लोगों को राहत देते हुए डोमिसाइल कानून बना दिया लेकिन इसमें एक नियम की कमी रह गई है। इस कानून में ऐसा कोई नियम नहीं बनाया गया है जिसमें यह साफ हो सके कि जम्मू कश्मीर की बेटियां महिला जब बाहरी राज्य के किसी व्यक्ति से शादी करती हैं तो उसके बच्चों और उसके पति को भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता का अधिकार मिलना चाहिए। भाजपा ने काफी जोर-शोर से यह कहा था कि हमने जम्मू-कश्मीर की बेटियों को इंसाफ दिलाया है लेकिन यह सिर्फ दावे ही साबित हुए हैं। डॉ. विकास ने कहा कि नए डोमिसाइल कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसमें जम्मू-कश्मीर की बाहरी राज्यों में ब्याही गई बेटियों को इंसाफ मिल सके। जब जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त हुआ था तो उस समय भाजपा ने जोर-शोर से कहा था कि बाहरी राज्यों में जम्मू-कश्मीर की जिन बेटियों ने शादी की है उनके परिवार जनों को फायदा होगा। डोमिसाइल कानून में ऐसा कोई प्रावधान या नियम नहीं है जिसके तहत बाहरी राज्यों में शादी करने वाली जम्मू कश्मीर की महिलाओं के पतियों या उनके बच्चों के डोमेसाइल प्रमाण पत्र बन सकें। डोमेसाइल में यह व्यवस्था जरूर की गई है कि कम से कम 15 वर्ष जम्मू कश्मीर में रहने वाले को डोमिसाइल दिया जाएगा लेकिन जो लोग बाहर से आ रहे हैं और जिन्होंने जम्मू कश्मीर की महिलाओं के साथ शादी की है उनके लिए डोमिसाइल कानून में नियम नहीं है क्या यह एक अचूक है या जानबूझकर किया गया है। इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को लोगों के सामने जाकर जवाब देना होगा कि अनुच्छेद 370 समाप्त होने का ऐसी बहनों बेटियों को क्या फायदा हुआ है। जम्मू में बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश या साथ लगते राज्यों में शादियां की हैं। महिलाओं को अधिकार तो पीआरसी के समय में मिलता था और अब दोनों साइड में भी उनको मिल जाएगा लेकिन उनके बच्चों के डोमेसाइल क्या बन पाएंगे इसके लिए कानून में प्रावधान नहीं है। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान-hindusthansamachar.in