अपनी पार्टी ने एसएचजी योजना को खत्म करने के विरोध में किया प्रदर्शन
अपनी पार्टी ने एसएचजी योजना को खत्म करने के विरोध में किया प्रदर्शन
जम्मू-कश्मीर

अपनी पार्टी ने एसएचजी योजना को खत्म करने के विरोध में किया प्रदर्शन

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जम्मू, 14 अक्टूबर (हि.स.)। अपनी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में इंजीनियरों की सेल्फ हेल्प ग्रुप योजना को खत्म करने के खिलाफ बुधवार को बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। इसने शिक्षित और योग्य इंजीनियरों को सरकार की परियोजनाओं में उनकी भागीदारी से वंचित कर दिया है। प्रांतीय अध्यक्ष मंजीत सिंह के नेतृत्व में अपनी पार्टी के नेता केंद्र शासित प्रदेश में एसएचजी योजना को फिर से शुरू करने की मांग के लिए डोगरा चौक पर इकट्ठे हुए। उनहोंने कहा कि इससे बेरोजगार इंजीनियरों को एक अनोखे तरीके से आजीविका के अवसर प्रदान किए गए थे। सरकार के एकतरफा फैसले के खिलाफ नारेबाजी करते हुए, अपनी पार्टी के नेताओं ने एक विरोध प्रदर्शन किया और कहा कि हजारों परिवार इस फैसले से प्रभावित हुए हैं जिस पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। विरोध प्रदर्शन का आयोजन अपनी पार्टी के नेता प्रणव शगोत्रा और रकीक अहमद खान ने किया, जिसमें चिनैनी से पूर्व विधायक फकीर नाथ, प्रांतीय अध्यक्ष महिला विंग नम्रता शर्मा, शंकर सिंह चिब, ऋषि ललोत्रा, सुरेश राणा, गौरव कपूर, अभय बकाया, जोगिंदर सिंह, पूर्व विधायक विजय हेतेशी, गुलाम मोहम्मद शाह, वैभव मट्टू, जगमीत सिंह बाली, सिमरनजीत सिंह, प्रक्षीत सगरोत्रा, मोहम्मद अफजल (जरी), अखिल शर्मा, रुद्र प्रताप सिंह, संजय धर, विक्की शर्मा आदि ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मंजीत सिंह ने कहा कि एसएचजी जैसी सफल योजना से लोगों की आशाओं को झटका लगा है, खासकर बेरोजगार युवा जो विभिन्न योजनाओं में नौकरी और सरकारी सहायता की तलाश में हैं। पूर्व मंत्री मंजीत सिंह ने कहा कि सरकार के निर्णय ने कुशल और अच्छी तरह से योग्य इंजीनियरों को उनके प्रदर्शन के बावजूद काम करने के बाद शिक्षित युवाओं को निराशा दी है। जब जम्मू-कश्मीर में 17 वर्षीय एसएचजी योजना मौजूद थी, तो उन्होंने कहा, पास-आउट इंजीनियर सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद अपने स्वयं सहायता समूह बनाएंगे और श्रम विभाग के साथ खुद को पंजीकृत करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें विभिन्न परियोजनाओं में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी के रूप में काम दिया गया था। सरकार ने उन्हें विकास परियोजनाओं में भागीदार बनाया था और वे भी जम्मू-कश्मीर की प्रगति और समृद्धि के लिए काम कर रहे थे। मंजीत सिंह ने आरोप लगाया कि सफल योजना को रद्द करने का अचानक फैसला नीति बनाने में खामियां दिखाता है, जिसने सरकार की नीतियों को लोगों के साथ जोडऩे में काफी हद तक विफल रही है। उन्होंने कहा जम्मू और कश्मीर में एसएचजी योजना को सरकार को फिर से लागू करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न केवल इंजीनियर, बल्कि इस योजना ने एसएचजी के कार्यालयों में युवाओं को रोजगार दिया था और कई परिवार सरकारी योजना पर निर्भर थे। प्रांतीय अध्यक्ष महिला विंग नम्रता शर्मा ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की विकास गतिविधियों में युवाओं को शामिल करने के लिए इस तरह के अभिनव विचारों को शुरू करने के बजाय सरकार ने विकास के दरवाजे बंद कर दिए हैं और नौकरशाही के वर्चस्व को जन्म दिया है जिसमें सरकार की सार्वजनिक भागीदारी छीन ली गई है। हिन्दुस्थान समाचार/अमरीक/बलवान-hindusthansamachar.in