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तिब्बत की आजादी चीन से भारत की सुरक्षा की गारंटी:आचार्य येशी फुंसुक

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मंडी, 23 फरवरी (हि. स.)। कोरोना वायरस के बाद अब चाईना प्रायोजित आपदा से भारत को अभी से सतर्क हो जाना चाहिए। उतराखंड के चमोली में जो गलेशियर गिरने की घटना से तबाही हुई है उसके पीछे चाईना का ही हाथ है। तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष आचार्य येशी फुंसुक ने मंगलवार को मंडी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में कहा कि कोरोना वायरस के बाद अब चाईना प्रायोजित आपदा से भारत को अभी से सतर्क हो जाना चाहिए। उतराखंड के चमोली में जो गलेशियर गिरने की घटना से तबाही हुई है उसके पीछे चाईना का ही हाथ है। भारत-तिब्बत के रिश्तों को चीन खराब करने की कोशिश में लगा है लेकिन वह अपने नापाक मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाएगा। तिब्बत वार्डर पर कई ऐसी मानव निर्मित झीलें चाइना बना चुका है जो प्रचु की तरह कभी भी कहर बरपाने के लिए तैयार बैठी हैं। उन्होंने बताया कि दलाई लामा ही अवतार है और वे ही आने वाले समय में अपने उत्तराधिकारी का चयन करेंगे। उन्होंने कहा कि चीन, तिब्बत और भारत के अन्य पड़ोसी देशों को भारत के खिलाफ उकसाने का काम कर रहा है जिसका फायदा उठाकर चीन अपनी सीमाओं का विस्तार करने में जुटा हुआ है। जब तक तिब्बत का मसला हल नहीं हो जाता तब तक चीन का सीमा विवाद नहीं थम सकता। तिब्बत को आजाद हुए भले ही 62 वर्ष होने वाले हैं लेकिन चीन वहां पर लगातार तिब्बत की संस्कृति और सभ्यता को समाप्त करने पर तुला हुआ है जिसका समाधान तिब्बत ने भारत की सरकार से जल्द करने की मांग उठाई है। येशी ने बताया कि भारत के साथ तिब्बत की सीमा, रहन-सहन और जलवायु मेल खाती है लेकिन चीन हमेशा भारत के पड़ोसी देशों को उकसाने में लगा रहता है। तिब्बत को बचाने के लिए वहां के निवासी कई प्रकार के बलिदान आए दिन देते हैं लेकिन चीन तिब्बत में तानाशाही करने से पीछे नहीं हटता है। इसके साथ ही उन्होंने लामा के अवतारों पर चीन के द्वारा अपना हक जताने की भी कड़ी निंदा की है। इस मौके पर उनके साथ मंडी तिब्बत समुदाय के लोग व भारत-तिब्बत मंत्री संगठन से दिनेश कुमार व अन्य भी मौजूद रहे। हिन्दुस्थान समाचार/मुरारी/सुनील