Purpose of contesting elections is to reach the end of Tibet's movement: Acharya Yashi
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हिमाचल-प्रदेश

तिब्बत के आंदोलन को अंजाम तक पंहुचाना ही चुनाव लड़ने का मकसद : आचार्य यशी

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धर्मशाला, 29 दिसम्बर (हि.स.)। निर्वासित तिब्बती संसद के उप-सभापति आचार्य यशी फुंचोक ने कहा कि पिछले छह दशकों से अधिक समय से तिब्बत की आजादी को संघर्ष चल रहा है। पहले धर्मगुरु दलाईलामा व निर्वासित तिब्बती संसद के प्रतिनिधि चीन के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता करते थे और चीन सरकार भी वार्ता के लिए राजी हो जाती थी। अब 2011 के बाद चीन ने वार्ता करना बंद कर दिया है। जबकि तिब्बती की आजादी व स्वायत्ता के लिए वार्ता बहुत जरूरी है। निर्वासित तिब्बती संसद के उप-सभापति एवं निर्वासित तिब्बती सरकार में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार आचार्य यशी ने यह बात मंगलवार को धर्मशाला में पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने कहा कि आगामी रविवार को निर्वासित तिब्बती संसद के चुनाव हैं। तिब्बती समुदाय के लोगों के आह्वान पर वह भी प्रधानमंत्री पद के लिए खड़े हुए हैं। इसलिए सभी तिब्बती समुदाय के 18 वर्ष से अधिक आयु के लोग जिनके पास मतदान का अधिकार हैं वे उस दिन अपने मताधिकार का जरूर प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि वे सभी तिब्बती लोगों से प्रजातन्त्र और लोकतंत्र में सहभागिता का आह्वान करते हैं। इसका मुख्य कारण ये है कि धर्मगुरु दलाईलामा भी लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाने को कहते हैं। उन्होंने कहा कि वह किसी पद को पाने के लिए नही बल्कि तिब्बती समुदाय की सेवा के लिए चुनावी मैदान में हैं। यशी ने कहा कि ये चुनाव तिब्बत आंदोलन को तेजी देने के लिए लड़ रहा हूं। उन्होंने कहा कि विश्व भर में 30 देशों में तिब्बतियन लोग रहते हैं। इसमें जो लोग निर्वासन में रहते हैं उन्हें भी इस चुनाव में भाग लेना चाहिए। दलाई लामा ने निर्वासन की शुरुआत से ही लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाने को कहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने 33 वर्ष भारत मे रहते हुए बनारस और शिमला में शिक्षा ली। अनेक साल तिब्बत संघर्ष में काम किया है और प्रशासनिक काम किए हैं। तिब्बत संघर्ष को लेकर 61 सालों में तिब्बती प्रतिनिधि 20 बार चीन प्रतिनिधियों से मिले। 2008 में जब 20वीं वार्ता हुई उसमंे उन्हें तिब्बत स्वायत्तता को लेकर पत्र दिया। लेकिन चीन शासन के साथ 2011 के बाद वार्ता ही नही हो पाई, जबकि चीन से भेंट करना जरूरी हैं। कम से कम दो से तीन बार वार्ता होना जरूरी है, तभी हल होगा। उन्होंने कहा कि उनका चुनाव लड़ने का मकसद तिब्बत आंदोलन को अंजाम तक पंहुचाना है। हिन्दुस्थान समाचार/सतेंद्र/सुनील-hindusthansamachar.in