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हिमाचल-प्रदेश

कोरोना का टीका लगने के बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत पर आईजीएमसी प्रशासन की सफाई

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शिमला, 22 फरवरी (हि.स.)। कोरोना वायरस का टीका लगने के बाद एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मौत के मामले में आईजीएमसी प्रशासन की तरफ से सफाई सामने आई है। आईजीएमसी प्रशासन ने इस आरोप को पूरी तरह से खारिज कर दिया है कि महिला की मौत कोरोना वैक्सीन के डोज के कारण ही हुई है। आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर जनक राज ने सोमवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि टीकाकरण में शामिल हुई इस महिला की मौत का कोविड-19 वैक्सीन से कोई लेना देना नहीं है। महिला की मृत्यु वैक्सीन से संबंधित नहीं है, बल्कि महिला की मौत अन्य बीमारी की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि महिला की मौत का शुरुआती कारण गुलिन बार सिंड्रोम बीमारी है। महिला की मौत वैक्सीन के कारण हुई है यह कहना गलत है। महिला के पैथोलॉजी पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही असल कारणों का पता चल पाएगा। डॉक्टर जनक राज ने बताया कि महिला को आईजीएमसी लाने के बाद उनको वेंटिलेटर में रखा गया क्योंकि महिला को गुलिन बार सिंड्रोम (गंभीर नसों की बीमारी) के कारण सांस लेने में तकलीफ हुई और शरीर के विभिन्न अंगों ने काम करना बंद कर दिया जिसके बाद महिला की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि महिला के मौत के असल कारणों का पैथोलॉजिकल पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद ही पता चला पायेगा जो 2-3 सप्ताह में आएगी। उल्लेखनीय है कि हमीरपुर जिला से ताल्लुक रखने वाली 56 वर्षीय महिला ने रविवार सुबह आईजीएमसी में दम तोड़ा था। इस महिला को गत 29 जनवरी को कोरोना का टीका लगा था। हालांकि महिला कोरोना से पीड़ित नहीं थी। टीकाकरण के कुछ दिन बाद महिला की तबीयत बिगड़ी और उसे हमीरपुर से टांडा अस्पताल भेजा गया। गत शनिवार को टांडा से महिला को आईजीएमसी रैफर किया गया था, जहां उसकी मृत्यु हो गई। कोरोना वैक्सीन लगाने के बाद महिला की मौत को लेकर स्वास्थ्य विभाग पर कोरोना वेक्सीनेशन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल/सुनील