इंजीनियर अनु सेन ने पीपल के पेड़ के नीचे निभाई पति की तेरहवीं की रश्म

इंजीनियर अनु सेन ने पीपल के पेड़ के नीचे निभाई पति की तेरहवीं की रश्म
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कोरोना संक्रमित पति को शादी का लाल जोड़ा पहन दी थी मुखग्रि मंडी, 07 मई (हि. स.)। कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने का डर लोगों में इनता ज्यादा है कि वह किसी के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो रहे है। जिले की बल्ह तहसील ग्राम पंचायत ग्राम पंचायत मगर पाधरु के गांव केंहचड़ी में 24 वर्षिय अनु सेन इंजीनियर ने बीते 26 अप्रैल को शादी के जोड़े में अपने पति को मुख अग्नि दी थी। 17 अप्रैल 2017 में अजित की शादी अनु सेन के साथ हुई थी। दोनों खुशी खुशी अपना जीवन यापन कर थे। केंहचड़ी गांव में कुछ ऐसा वाक्य सामने आया जब यहां एक 31 वर्षीय युवक की कोरोना कारणों से मौत हो गई तो ना रिश्तेदार आए और ना ही पड़ोसी। क्योंकि यह गांव पहले से कंटेन्मेंट जोन में प्रशासन के द्वारा रखा गया है। युवक की अर्थी को कंधा देने के लिए भी चार लोग नसीब नहीं हुए। इसके बाद पत्नी ने किसी तरह कुछ रिस्तेदारों सदस्य की मदद से शव को शमशानघाट पहुंचाया और शादी का लाल जोड़ा पहनकर खुद ही पति की चिता को मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार पूरा किया। शुक्रवार को युवक की तेरहवीं की रश्में पत्नी ने गांव के खुले स्थान पर पीपल के पेड़ के नीचे खुद निभाई। हालांकि इस दौरान कोविड नियमों का उसने बखूबी पालन किया और सामाजिक दूरी कायम रखी। गांव के 31 वर्षिय युवक अजीत सेन की पंजाब के पटियाला अस्पताल में कोरोना कारणों से मौत हो गई। लेकिन पति की मौत पर 24 वर्षीय इंजीनियर अनु सेन का हौंसला नहीं टूटा। अजीत सेन चंडीगढ़ की निजी कस्ट्रक्शन कंपनी में बतौर मैनेजर की नौकरी परर कार्यरत था । गत 18 अप्रैल को उसे हल्की खाँसी की शिकायत हुई, जिसके लिए उसने चंडीगढ़ के अस्पताल में उपचार लेना चाहा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे कोरोना टेस्ट करने की सलाह दी। 20 तारीख को टेस्ट करवाया ओर टेस्ट कि रिपोर्ट 22 अप्रैल को दोनों पति पत्नी कि आई जिसमे दोनों कोरौना पॉजिटिव पाए गए। जिसके तुरंत बाद डॉक्टरों ने होम आइसोलेशन की सलाह दी । इसके बाद वह किराए के मकान में आइसोलेट हो गया। उसके बाद 24 अप्रैल की शाम 8 बजे के करीब अजीत की तबियत खराब होने पर उन्हें उनकी पत्नी द्वारा नजदीक के अस्पताल में ले जाया गया और ऑक्सीजन का स्तर गिर गया। जहा डॉक्टरों ने हालत को देखते हुए मोहाली सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया । लेकिन वहां के डॉक्टरों ने अजीत सेन को पटियाला के राजेंद्रा अस्पताल में रैफर कर दिया जहां 25 अप्रैल को पटियाला अस्पताल के वेंटिलेटर में उपचार के दौरान उसके पति की मौत हो गई। पत्नी अनु सेन ने पति का शव लेकर पटियाला से गांव तक ले आई। वहां कोरोना महामारी के बीच उसने रिस्तेदारों और आसपड़ोस के लोगों के नजरिए का दंश जाना। जहां शव यात्रा में शामिल होने के लिए गांव से लेकर प्रशासन तक का एक भी आदमी नहीं आया। शव जलाने के लिए कुछ ग्रामीणों ने जरूर मदद की लेकिन वे भी लकडिय़ां घाट पर छोड़ कर शव आने के बाद गायब हो गए। अनु सेन के माइके वालों ने ही शव यात्रा मे भाग लेकर अंतिम संस्कार किया। अजीत सेन के पिता प्रकाश सेन ने बताया कि बेटे के अंतिम संस्कार के लिए पंचायत और प्रशासन ने उनकी कोई मदद नहीं की। यहां तक स्थानीय विधायक ने भी कोई कष्ट नहीं किया । वर्षों तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सेवानिवृत्त नायब सूबेदार के साथ यह अमानवीय व्यवहार उन्हें अंदर से कटोच रहा है। उन्होंने बताया कि बेटे की मृत होने की सूचना प्रशासन को दी गई थी ,लेकिन प्रशासन की ओर से शव जलाने के लिए लोग नहीं भेजे गए। केवल छह पीपीई किट भेजी गई उनमें भी खामियां थी। पिता ने इस व्यवहार के लिए गहरा दु:ख व्यक्त किया है और उन लोगों का आभार जरूर व्यक्त किया जिन्होंने हौसला दिखाकर चिता के लिए लकड़ी मुहैया करवाई। हिन्दुस्थान समाचार/मुरारी/सुनील