हिमाचल मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, तीन विधायक बने मंत्री
हिमाचल मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, तीन विधायक बने मंत्री
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हिमाचल मंत्रिमंडल का हुआ विस्तार, तीन विधायक बने मंत्री

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- सुखराम चौधरी, राकेश पठानिया और राजेंद्र गर्ग ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर ली शपथ शिमला, 30 जुलाई (हि.स.)। हिमाचल में भाजपा शासित जयराम सरकार का गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार किया गया। सुबह 11ः15 बजे शिमला स्थित राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने नए मंत्रियों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलवाई। इस दौरान तीन विधायकों ने मंत्रियों के रूप में शपथ ली। सिरमौर, कांगड़ा और बिलासपुर जिलों को मंत्रिमंडल विस्तार में प्रतिनिधित्व मिला है। मंत्री के रूप में सबसे पहले सिरमौर के पांवटा साहिब से विधायक सुखराम चौधरी ने शपथ ली। इसके बाद कांगड़ा के नुरपुर से विधायक राकेश पठानिया ने शपथ ली। बिलासपुर के घुमारवीं से विधायक राजेंद्र गर्ग ने भी मंत्री के तौर पर शपथ ली। तीनों विधायक पहली बार मंत्री बने हैं। इनमें चौंकाने वाला नाम राजेंद्र गर्ग का है, जो पहली बार विधायक बनने के बाद मंत्री बनने में कामयाब हो गए। पहली बार शपथ लेने वाले सुखराम चौधरी तीन बार के विधायक हैं। 56 वर्षीय सुखराम वर्ष 2003 और वर्ष 2007 में लगातार दो बार विधायक निर्वाचित हुए। वर्ष 2012 में वह जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गए थे लेकिन वर्ष 2017 में फिर जीत हासिल कर वह एक बार फिर विधायक बने। नूरपुर के विधायक राकेश पठानिया भी तीन बार के विधायक हैं। 56 वर्षीय राकेश पठानिया की गिनती तेज तर्रार भाजपा विधायक के रूप में होती है। उनका सियासी कैरियर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। राकेश पठानिया कांगड़ा जिला के नूरपुर विधानसभा हल्के से तीसरी बार विधायक बने हैं। वर्ष 1998 में वह पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे। वर्ष 2007 में पार्टी का टिकट कटने पर उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीता तथा धूमल सरकार में एसोसिएट विधायक बने। हालांकि साल 2012 में भाजपा ने एक बार फिर टिकट काटकर उन्हें राजनीतिक हाशिए पर धकेल दिया था। 2017 के विधानसभा चुनाव में राकेश पठानिया ने कांग्रेस के अजय महाजन को पराजित कर तीसरी बार विधानसभा में प्रवेश किया। मंत्री बनने वाले 54 वर्षीय राजेन्द्र गर्ग घुमारवीं से भाजपा के विधायक हैं। वह मौजूदा मंत्रिमंडल में एकमात्र ऐसे मंत्री हैं, जिन्हें पहली बार विधायक बनने के बाद कैबिनेट में शामिल किया गया है। राजेंद्र गर्ग ने वर्ष 2012 में पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। साल 2017 में उन्होंने बिलासपुर के अब तक के इतिहास में सबसे ज्यादा अंतर से बड़ी जीत दर्ज की है। राजेंद्र गर्ग की सियासत की शुरुआत छात्र संगठन एबीवीपी से हुई। वर्ष 1986-87 में वह बिलासपुर एबीवीपी के संयोजक रहे। 1987-88 में राज्य सचिव बने। वह सात साल एबीवीपी में पूर्णकालिक प्रचारक के रूप में मध्य प्रदेश में रहे हैं। राजेंद्र गर्ग को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का करीबी माना जाता है। इसके बाद राजेन्द्र गर्ग ने पत्रकारिता जगत में भी काम किया। वर्ष 2000 से 2006 तक वह एक दैनिक समाचार पत्र में स्थानीय संवाददाता रहे। उल्लेखनीय है कि खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री किशन कपूर के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद संसद पहुंचने तथा तत्कालीन ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के त्याग पत्र के बाद प्रदेश मंत्रिमंडल में दो पद खाली हो गए। इसके बाद राजनीतिक घटनाक्रम ने कुछ इस कदर करवट बदली कि स्वास्थ्य मंत्री विपिन सिंह परमार विधान सभा अध्यक्ष बनाए गए। इसके बाद से काफी समय से मंत्रिमंडल में तीन पद खाली थे। कैबिनेट विस्तार के दौरान हतप्रभ करने वाली बात यह रही कि पूर्व भाजपा अध्यक्ष व नाहन से विधायक राजीव बिंदल को कैबिनेट में जगह नहीं मिली है। स्वास्थ्य घोटाले में घिरे बिंदल ने दो माह पहले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। अढ़ाई साल पहले जयराम सरकार के गठन पर राजीव बिंदल विधानसभा अध्यक्ष बनाए गए थे। इसी साल जनवरी माह में उन्हांेने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था और उनकी ताजपोशी प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष पद पर हो गई थी। हालांकि दो माह पहले स्वास्थ्य घोटाले में आरोप लगने के बाद बिंदल ने अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। हिन्दुस्थान समाचार/उज्जवल/सुनील/सुनीत-hindusthansamachar.in