सांझी माता की प्राचीन पूजन परम्परा आज भी है कायम
सांझी माता की प्राचीन पूजन परम्परा आज भी है कायम
हिमाचल-प्रदेश

सांझी माता की प्राचीन पूजन परम्परा आज भी है कायम

news

नाहन में आज भी मिट्टी और गोबर से बनी सांंझी माता की होती है पूजा नाहन,18 अक्टूबर (हि.स.)। जिला मुख्यालय नाहन व हरियाणा के सीमांत क्षेत्र के लोग नवरात्रों की शुरुआत माता सांझी की पूजा से करते हैं। सांझी माता को धन वैभव दात्री माना जाता है। सांझी माता की पूजा के लिए माता का स्वरूप दीवार पर गोबर, मिटटी व रुई आदि से बनाया जाता है और पूरे नवरात्र में इनकी पूजा की जाती है। नवरात्र की समाप्ति पर इसका विसर्जन किया जाता है। नाहन में वर्षों से माता सांझी की पूजा की परंपरा कायम रही है, लेकिन अब बदलते परिवेश में इस प्रतिमा का स्थान कैलेंडर लेने लगे हैं। मगर आज भी कुछ परिवार हैं, जो इस परम्परा को जीवित रखे हैं। नाहन निवासी राकेश गुप्ता व उनका परिवार हर वर्ष गोबर, मिटटी लेकर सांझी माता की प्रतिमा बनाते हैं, जिसे देखने लोग पहुंचते हैं। गुप्ता ने बताया कि वह इस प्रतिमा के लिए विशेष तौर पर काला अम्ब से मिटटी और गोबर लाते हैं और उनकी पत्नी व बेटी रुई व कपड़े आदि से सुंदर प्रतिमा को दीवार पर बनाती हैं। प्रतिमा को देखने काफी संख्या में लोग यहां आते हैं। इस वर्ष कोरोना संकट से लोगों को जागरूक करने के लिए माता की प्रतिमा को मास्क भी पहनाया गया है। बेटी अलीशा ने बताया कि वो लोग हमेशा से गोबर, मिटटी, रुई व पेपर से सांझी माता बनाते आ रहे हैं। इस बार उन्होंने माता को मास्क भी लगाया है और सेनिटाइजर भी थमाया है ताकि लोग इससे जागरूक हों। सुनीता गुप्ता ने बताया कि वो इस परम्परा को जीवित रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और लोगों को कैलेंडर से पूजा करने की बजाए गोबर, मिटटी से बनी प्रतिमा का पूजन करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार /जितेंदर-hindusthansamachar.in