समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का सहेजे हुए है प्रताप का संग्रहालय
समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का सहेजे हुए है प्रताप का संग्रहालय
हिमाचल-प्रदेश

समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का सहेजे हुए है प्रताप का संग्रहालय

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मंडी, 17 जुलाई (हि. स.)। जहां एक ओर केंद्र व प्रदेश सरकार संस्कृति को संजोए रखने के लिए करोड़ों के बजट का प्रावधान करती है। वहीं जिला मंडी के एक सेवानिवृत्त अधिकारी द्वारा निर्मित संग्रहालय पिछले छ सालों से विभाग की उपेक्षा का शिकार बन गया है। कला प्रेमियों और इतिहास को जानने के लिए उत्साही और जिज्ञासु लोगों के लिए किसी खजाने के समान प्रताप संग्रहालय ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है। यहां कई दुर्लभ वस्तुएं संरक्षित हैं। संग्रहालय में राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरें रखी हैं। बिजली बोर्ड से सेवानिवृत्त सहायक अभियंता ई. प्रताप ठाकुर द्वारा 40 साल से किए जा रहे संग्रह पर आधारित यह संग्रहालय जिला मु यालय से 40 किलोमीटर दूर जिले के प्र यात शक्तिपीठ मुरारी देवी मार्ग पर लेदा से दो किलोमीटर की दूरी पर सिकंदराधार पर स्थापित किया गया है। प्रताप ठाकुर सेवानिवृत्त होने के बाद अपने इस संग्रहालय में हिमाचल सहित अन्य प्रदेशों की संस्कृति को संजोए हुए हैं। प्रताप सिंह ठाकुर ने अपनी इस ललक को लेकर वर्ष 1966 से वस्तुओं को संग्रहित करना शुरू कर दिया था। वर्ष 2014 में प्रताप सिंह ठाकुर ने पुरातत्व संरक्षण परिषद सिकंदराधार के नाम से समिति बनाकर इस अमूल्य संग्रहालय का निर्माण किया था। वहीं इस संग्रहालय के निर्माण और अन्य वस्तुओं के लिए प्रताप ठाकुर लगभग आठ लाख रुपयों का व्यय कर चुके हैं। प्रताप अपने 40 वर्षों के सेवाकाल के दौरान प्रकृति और संस्कृति प्रेमी हैं और इससे रूबरू होने के लिए हिमाचल सहित अन्य राज्यों के दार्शनिक स्थलों का भ्रमण कर चुके हैं। इन जगहों को अपने पास संजोने के लिए प्रताप सिंह ने चित्रों को भी अपने पास संग्रहित कर रखा हुआ है। संग्रहकर्ता व संस्थापक प्रताप ठाकुर ने कहा कि लगभग 100 ऐसी वस्तुओं का संग्रह इस संग्रहालय में रखा गया है जो अब दुर्लभ है। इनमें लकड़ी के बने बर्तन, पारू, गिलास, पटारी, चमड़े व घास से बनी प्राचीन प्रयोग का सामान, चरखें आदि है। नक्काशीयुक्त पत्थर की मूर्तिया आदि भी इसमें रखी गई है। प्रताप संग्रहालय में पुराने चांदी के आभूषण, तीन सौ साल पुरानी बांस की पटारी, मंडी जिला में त्योहारों के समय बनाए जाने वाली लोकल डिश ऐंकलू के लिए 150 वर्ष पुरानी च्वाईसी सहित अन्य कई वस्तुुएं संग्रहित की गई हैं। इस कार्य में प्रदेश सहित अन्य राज्यों के लोगों ने भी प्रताप ठाकुर का साथ दिया है और घरों पर मौजूद पुरानी एतिहासिक वस्तुएं उन्हें संग्रहित करने के लिए दी गई। प्रताप संग्रहालय में विलुप्त हो चुकी चीजों के अलावा दुर्लभ छायाचित्रों का भी संग्रह लगाया गया है। प्रताप ठाकुर ने कहा कि 66 छायाचित्र जिसमें मेले, मंदिर, झीलें व अन्य कई तरह का संग्रह है, इसमें प्रदर्शित किया गया है। 69 वर्षीय प्रताप ठाकुर ने कहा कि वह सरकारी सेवा में रहते हुए भी जब जब उन्हे समय मिलता रहा है, वह प्रदेशभर का भ्रमण करते रहे है। 40 साल तक उन्होंने प्रदेश के कोने-कोने का भ्रमण किया और छायांकन भी किया। प्रताप ठाकुर ने कहा कि संग्रहालय की स्थापना उनका सपना था, जो पूरा हो गया। भविष्य में इस संग्रहालय का और विस्तार किया जाएगा। सरकाघाट और बल्ह विधानसभा क्षेत्रों की सीमा पर मुरारी माता मंदिर व मंडी बलद्वाड़ा मार्ग पर स्थापित यह संग्रहालय इस मार्ग से गुजरने वालों के लिए एक अच्छा ठहराव के साथ स्कूली बच्चों व शोधकर्ताओं के लिए भी यह बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। प्रताप ठाकुर ने कहा कि सांसद से लेकर विधायक,डीसी, बीडीओ,संबंधित विभाग सहित अन्य अधिकारी भी इस संग्रहालय का दौरा कर इसे सराह चुके हैं। लेकिन इसको व्यवस्थित करने को लेकर आजदिन तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा कि सभी कागजात विभाग को भेजे गए और डीसी मंडी की ओर से बिल्डिंग बनाने के लिए अंशदान के रूप में पैसा प्राप्त हुआ। इसके उपरांत विभाग से अन्य कार्यो को पूरा करने के लिए कोई राशि नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि सांसद, विधायक और डीसी भी संग्रहालय का दौरा कर आर्ट गैलरी का निरक्षण कर सरहाना कर चुके है। उन्होंने कहा कि अगर प्रसाशन अंशदान के रूप में कुछ सहायता करे तो इस आर्ट गैलरी को अच्छे से तैयार किया जा सकता है और जनता को समर्पित किया जा सकता है। हिन्दुस्थान समाचार/मुरारी/सुनील-hindusthansamachar.in