शान्ता के ड्रीम प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने की खारिज
शान्ता के ड्रीम प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने की खारिज
हिमाचल-प्रदेश

शान्ता के ड्रीम प्रोजेक्ट को चुनौती देने वाली याचिका हाई कोर्ट ने की खारिज

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शिमला, 16 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट को चुनौती देने वाली याचिका को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एक लाख रुपये की कॉस्ट के साथ ख़ारिज कर दिया है। प्रार्थी भुवनेश चंद सूद ने शांता कुमार ने विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट को स्थापित करने को चुनौती दी थी। शुक्रवार को हाई कोर्ट न्यायमूर्ति तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश ज्योत्स्ना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि जनहित याचिका एक ऐसा हथियार है, जिसे बड़ी देखभाल और चौकसी के साथ प्रयोग किया जाता है और अदालत को यह देखना चाहिए कि जनहित याचिका के सुंदर घूंघट के पीछे कोई बदसूरत निजी द्वेष, निहित स्वार्थ तो नहीं छिपा है। जनहित याचिका का इस्तेमाल सामाजिक उद्धार के लिए एक प्रभावी हथियार है। प्रार्थी ने याचिका को ख़ारिज करते हुए कोर्ट ने पाया कि प्रार्थी ने तथ्यहीन याचिका दायर की है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए साफ़ मन, स्वच्छ हृदय और स्वच्छ उद्देश्य का होना बहुत जरुरी है। प्रार्थी ने याचिका में आरोप लगाया था कि शांता कुमार जब प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने अपनी शक्तियों का दुरुप्रयोग कर इस प्रोजेक्ट के लिए चाय बागान वाली भूमि को बंजर कदीम करवा दिया। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि वर्ष 1992 में राज्य सरकार ने कांगड़ा जिला के गाँव होलटा में सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बनाए जाने का निर्णय लिया था जिसके लिए सारी औपचारिकताएं कानूनी तरीके से पूरी की गई है। कोर्ट ने मामले से जुड़े तमाम रिकॉर्ड का अवलोकन करने के पश्चात् पाया कि मुख्यमंत्री शांता कुमार के ड्रीम प्रोजेक्ट विवेकानंद मेडिकल रिसर्च ट्रस्ट के लिए सारी औपचारिकताये कानूनी तरीके से पूरी की गई है और प्रार्थी ने बेबुनियादी याचिका दायर कर अदालत का समय बर्बाद किया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील-hindusthansamachar.in