भू-कानूनों पर एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में आए कई महत्वपूर्ण सुझाव
भू-कानूनों पर एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में आए कई महत्वपूर्ण सुझाव
हिमाचल-प्रदेश

भू-कानूनों पर एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में आए कई महत्वपूर्ण सुझाव

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हिमाचल प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में 94,902 मामले लंबित समनों की तामील की व्यवस्था कारगर बनाने का दिया सुझाव शिमला, 20 अक्टूबर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश में लगभग 94,902 मामले विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लम्बित हैं। इनमें तकसीम के 29,313, निशानदेही के 18,025, इन्तकाल के 25,251, दुरुस्ती इन्द्राज के 2,497, अतिक्रमण के 2,837 और 16,790 अन्य मामले शामिल हैं। यह जानकारी मंगलवार को राजस्व मन्त्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने भू-कानूनों पर प्रदेश सरकार की एक्सपर्ट कमेटी की बैठक में दी। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप, प्रदेश सरकार ने भूमिहीन एवं गृहहीन परिवारों को रिहायसी मकान के निर्माण के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में तीन बिस्वा और शहरी क्षेत्रों में दो बिस्वा भूमि देने का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त, जनजातीय क्षेत्रों में नौतोड़ नियमों के अंतर्गत, नौतोड़ भूमि आवंटन का प्रावधान है, लेकिन इन क्षेत्रों में भी वन संरक्षण अधिनियम के प्रावधान लागू होने के कारण भूमि का आवंटन नहीं हो पा रहा है। समिति ने इस समस्या पर गहन विचार किया तथा इसके निराकरण के लिए सुझाव दिए। बैठक में सदस्यों का कहना था कि तकसीम, निशानदेही, इन्तकाल, दुरुस्ती इन्द्राज आदि के मामलों में समनों की तामील समय पर नहीं होने का कारण बहुत विलम्ब होता है। इसलिए समनों की तामील की व्यवस्था समयबद्ध और कारगर बनाई जाए। इसके अतिरिक्त सदस्यों ने बन्दोबस्त की प्रक्रिया को सरल करने और इसमें आधुनिक उपकरणों की सहायता के इस्तेमाल के सुझाव दिए। सदस्यों ने भू-राजस्व के निर्धारण को सरल एवं समयबद्ध बनाने का सुझाव भी दिया। सदस्यों ने विभाग को बताया कि प्रदेश में ऐसे बहुत से मामले लम्बित हैं, जिनमें सरकारी भूमि को नौतोड़ के रूप में पात्र व्यक्तियों को आवंटित किया गया है, लेकिन इसके पट्टे जारी नहीं हुए हैं या इंतकाल लम्बित हैं। इस कारण अभी तक मालिकाना हक नहीं मिले हैं तथा उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक में हिमाचल प्रदेश मुजारियत एवं भू-सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 45, 104 व 118 पर विचार करने के उपरान्त इन्हें व्यावहारिक बनाने के लिए आवश्यक संशोधन का सुझाव आया। बैठक में धारा-118 के प्रावधानों को इसके मूल उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इसमें मौजूद कमियों को दूर करने पर विचार किया गया। साथ ही इसे प्रदेश के विकास एवं रोजगार सृजन के दृष्टिगत सरल एवं पारदर्शी बनाने पर चर्चा की गई। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल-hindusthansamachar.in