बेनामी सम्पतियों पर कांग्रेस का हंगामा, विधानसभा से वाकआउट
बेनामी सम्पतियों पर कांग्रेस का हंगामा, विधानसभा से वाकआउट
हिमाचल-प्रदेश

बेनामी सम्पतियों पर कांग्रेस का हंगामा, विधानसभा से वाकआउट

news

शिमला, 15 सितम्बर (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को विपक्ष ने राज्य में बेनामी संपत्तियों और जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला उठाते हुए सदन में जमकर हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्य राजेंद्र राणा ने राज्य में जमीन खरीद का मामला उठाया, लेकिन अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने यह कहकर इजाजत नहीं दी कि मामले को आगामी कार्यवाही के लिए सरकार को भेजा है। इसके बाद विपक्ष ने सदन में भारी हो-हल्ला किया और नारेबाजी करनी शुरू कर दी। इस बीच अध्यक्ष के बार-बार आग्रह करने के बावजूद विपक्षी सदस्य अपनी बात पर अड़े रहे और बात न मानी जाने पर उन्होंने सदन से वाकआउट कर दिया। उधर, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और संसदीय कार्यमंत्री सुरेश भारद्वाज ने विपक्ष के इस वाकआउट को निंदनीय करार दिया और कहा कि विपक्ष का यह व्यवहार सही नहीं है। मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस सदस्य राजेंद्र राणा राज्य में बेनामी संपत्तियों और जमीनों की खरीद-फरोख्त का मामला उठाना चाहा। लेकिन अध्यक्ष ने इसकी इजाजत नहीं दी। विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार ने कहा कि आज सुबह नियम 67 के तहत कांग्रेस सदस्यों ने बेनामी संपत्तियों और जमीन की खरीद-फरोख्त पर चर्चा करने को स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस नोटिस को टिप्पणी को सरकार को प्रेषित कर दिया है और वहां से उत्तर आते ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का निर्णय आने के बाद वे इस मामले पर चर्चा का समय देंगे। विपक्षी सदस्य उस समय अपनी बात रखना चाह रहे थे। अध्यक्ष द्वारा इजाजत न देने पर विपक्षी सदस्यों ने सदन में शोरगुल और फिर नारेबाजी करनी शुरू कर दी। अध्यक्ष ने कहा कि स्थगन प्रस्ताव तो नहीं आएगा, फिर भी टिप्पणी के लिए मामला सरकार को भेज दिया है। उन्होंने कांग्रेस सदस्यों से कहा कि जो दस्तावेज उनके पास है, उन्हें वे सदन के पटल पर रखें, वे उसकी पड़ताल करेंगे। वहीं, कांग्रेस सदस्य राजेंद्र राणा ने कहा कि सरकार इस मामले पर क्यों चर्चा करना नहीं चाह रही। उन्होंने कहा कि क्या छिपाया जा रहा है और क्यों बात रखने नहीं दी जा रही है। उधर, अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना मामले पर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा करवाई है। उन्होंने कहा कि जो तथ्य हैं, उन पर सरकार से जवाब आने के बाद चर्चा करवाएंगे। लेकिन कांग्रेस सदस्य अपनी बात पर अड़े रहे और सदन में नारेबाजी करने के बाद विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि सदन नियमों के अनुसार चलता है और सदस्यों को अपनी बात रखने का अधिकार है। नियम 67 के तहत कोविड पर चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि नियम 67 के तहत चर्चा तीन दिन तक चली। भारद्वाज ने कहा कि विपक्ष सनसनी फैलाने कि लिए ऐसे मामले उठाता है। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल को बंद कर विपक्ष लाखों रुपये का नुकसान कर रहा है। आज नियम 67 का नोटिस दिया है। उसमें कोई तथ्य नहीं दिया गया है और बिना तथ्य के इस नियम में कैसे चर्चा हो सकती है। उन्होंने कहा कि नोटिस को अधिकारियों को दे दिया है और फिर जिस नियम में उचित होगा, उस नियम में चर्चा की जाएगी। इस बीच मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने विपक्ष के व्यवहार को निंदनीय करार दिया और कहा कि प्रश्नकाल को चलाने के लिए बहुत सी सूचनाएं एकत्र करनी होती हैं। ऐसे में प्रश्नकाल होने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्थगन प्रस्ताव पर पहली बार चर्चा करवाई, क्योंकि कोविड-19 का विषय ही इतना बड़ा था। विपक्ष ने चर्चा को तो उठाया, लेकिन तर्क के साथ चर्चा किसी ने नहीं की। अब नियम 67 के तहत इन्होंने नोटिस दिया है, लेकिन जब स्पीकर ने व्यवस्था दे दी कि सरकार की टिप्पणी मांगी गई है। इसमें वक्त लगेगा, क्योंकि मामला पूरे राज्य का है। ऐसे में विपक्ष को संयम रखना चाहिए। सीएम ने कहा कि चर्चा में रहने के लिए सदन से बाहर जाना उचित नहीं है, वह इस वाकआउट की निंदा करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/उज्ज्वल/बच्चन-hindusthansamachar.in