(अपडेट) एएसआई राकेश कुमार: 1200 शवों के कराए अंतिम संस्कार, 80 को दी मुखाग्नि

(अपडेट) एएसआई राकेश कुमार: 1200 शवों के कराए अंतिम संस्कार, 80 को दी मुखाग्नि
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नई दिल्ली, 07 मई (हि.स.)। कोरोना संक्रमण के इस कठिन दौर में जहां अपने भी साथ छोड़ रहे हैं, वहां दिल्ली पुलिस का एक एएसआई राकेश कुमार इस गंभीर बीमारी की चपेट में आने से जान गंवाने वालों को न सिर्फ कंधा दे रहे हैं, बल्कि श्मशान में अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। इंसानियत की मिसाल कायम करने वाले राकेश शुक्रवार तक करीब 1200 शवों के अंतिम संस्कार करा चुके हैं, जबकि इस दौरान ये करीब 80 के आसपास को उनके परिजन नहीं होने पर मुखाग्नि तक दे चुके हैं। इतना ही नहीं कोरोना संक्रमित शवों के अंतिम यात्रा के इस पड़ाव में लगातार व्यस्त होने के कारण इन्होंने अपनी बेटी की शादी भी टाल दी है। 56 साल के इस एएसआई की साउथ-ईस्ट दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन थाने में तैनाती है। ये इन दिनों लोधी रोड श्मशान घाट में आने वाले कोरोना मृतकों के शवों के अंतिम संस्कार कराने में मदद करने का काम कर रहे हैं। इनकी गत 13 अप्रैल से ही यहां ड्यूटी लगी है। तब से लेकर यह हर रोज लोधी रोड श्मशान में ऐसे शवों के अंतिम संस्कार कराने में बिना किसी डर के साहस के साथ जुटे हुए हैं। इनके इस मानवीय पहलू व बहादुरी को आज सिर्फ पुलिस महकमा ही नहीं अन्य लोग भी सलाम कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने खुद ट्वीट कर इन्हें विभाग का असली हीरो बताया है। आज होनी थी बेटी की शादी मूलरूप से यूपी के बड़ौत जिले के रहने वाले राकेश कुमार इस काम को डयूटी से ज्यादा मानव धर्म मानते हैं। इसलिए इन्होंने आज होने वाली अपनी इकलौती बेटी शादी भी टाल दिया। उन्होंने कहा कि इस वक्त इस महामारी से हुई मौत के बाद श्मशान आने वाले शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी सबसे बड़ी है। बेटी की शादी तो बाद में भी कर लेंगे। पहले मानव धर्म का निभा लें, फिर पिता धर्म निभाएंगे। राकेश के परिवार में उनकी पत्नी के अलावा दो बेटे व एक बेटी, जिसकी शुक्रवार, 7 मई को शादी होने वाली थी। इनके तीनों ही बच्चे गांव में रहते हैं। एक खेतीबारी संभालता है तो दूसरा गाड़ियों की मरम्मत व धुलाई का काम करता है। जबकि बेटी बीएड की पढ़ाई कर रही है। इसकी ही शादी होनी थी। वैक्सीन की दोनों डोज लगा ली है उन्होंने कहा कि मैंने वैक्सीन की दोनों डोज लगवा रखी है। ऐसे में मैने सोचा कि इस महामारी काल में अगर मुझे इंसानियत का फर्ज निभाने का मौका मिला है तो मैं जरूर लोगों की मदद करूंगा, जिससे उन्हें भी सकून मिलेगा और मरने वाले के अंतिम संस्कार में भी कोई दिक्कत नही होगी। हालांकि कि अपने बचाव के लिए वह हर वक्त हर वक्त मास्क, ग्लव्स व फेसशिल्ड पहनकर इस काम में जुटे रहते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी