राष्ट्रीय हरित आयोग के आदेश से रामलीला मंचन पर संकट गहराया

राष्ट्रीय हरित आयोग के आदेश से रामलीला मंचन पर संकट गहराया
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-मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के समय से रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रामलीला पर निगम ने लगाई रोक नई दिल्ली, 24 मार्च (हि.स.)। राष्ट्रीय हरित आयोग के जरिए पार्क आदि में किसी भी तरह के आयोजन पर पूरी तरह से रोक लगाने के आदेश के कारण दिल्ली में आयोजित होने वाली रामलीला मंचन पर संकट के बादल गहरा गए हैं। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने हरित आयोग के इस आदेश का हवाला देते हुए रामलीला मैदान में लीला मंचन का आयोजन करने वाली कमेटी को आयोजन की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। राष्ट्रीय हरित आयोग के इस आदेश से रामलीला मैदान में मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के समय से आयोजित होने वाली रामलीला पर भी संकट गहरा गया है। गौरतलब है कि दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में हर साल रामलीला का मंचन होता है। इस एतिहासिक रामलीला मंचन में क्षेत्र में सदियों से मिलजुल कर एक साथ रहने वाले हिंदू- मुसलमान मिलकर भाग लेते हैं और पुरानी दिल्ली की गंगा जमुनी तहजीब का यहां पर अद्भुत नजारा देखने को मिलता है, लेकिन राष्ट्रीय हरित आयोग के इस नए आदेशों की वजह से उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने रामलीला कमेटी को एक पत्र भेजकर यहां पर आयोजन करने के लिए मना कर दिया है। महात्यागी सेवा संस्थान और मंदिर हनुमान वाटिका से जुड़े पूर्व निगम पार्षद अशोक जैन ने बुधवार को यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में जानकारी देते हुए बताया कि उनकी तरफ से राम नवमी के अवसर पर आयोजित होने वाली रामलीला के लिए दिल्ली नगर निगम को एक पत्र भेजा गया था, जिसके जवाब में दिल्ली नगर निगम ने एक पत्र भेजा है जिसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय हरित ने रामलीला मैदान में किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं देने का आदेश दिया है। इस आदेश का पालन करते हुए दिल्ली नगर निगम यहां पर किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दे सकता है। अशोक जैन का कहना है कि रामलीला मैदान में सदियों से रामलीला आयोजित होती आ रही है और इस मैदान को रामलीला के लिए ही बनाया गया है। इसलिए नगर निगम हमें रामलीला का मंचन करने से कैसे रोक सकता है। उनका कहना है कि जहां पूरा देश अयोध्या में श्रीराम का भव्य मंदिर बनाने के लिए अपना योगदान दे रहा है वहीं दिल्ली में रामलीला के मंचन पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने और राष्ट्रीय हरित आयोग पर दबाव बना कर अपना फैसला वापस लेने के लिए उचित कार्रवाई करने की मांग की है। हिन्दुस्थान समाचार/एम ओवैस

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