दिल्ली सरकार और डीयू के मतभेदों में पिस रहे हैं शिक्षक : डॉ. राजेश कुमार झा
दिल्ली सरकार और डीयू के मतभेदों में पिस रहे हैं शिक्षक : डॉ. राजेश कुमार झा
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दिल्ली सरकार और डीयू के मतभेदों में पिस रहे हैं शिक्षक : डॉ. राजेश कुमार झा

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नई दिल्ली, 31 जुलाई (हि.स.)। एकेडेमिक फॉर एक्शन एंड डेवलपमेंट (एएडी) एवं यूटीएफ के विद्वत परिषद और कार्यकारणी समिति के सदस्यों ने दिल्ली राज्य के शिक्षा मंत्री से मांग की है कि दिल्ली सरकार 12 ( सौ प्रतिशत वित्त पोषित) कॉलेजों का फंड बिना किसी देरी के जारी करें। सदस्यों ने कहा है कि इन कॉलेजों के फैकल्टी और स्टाफ पिछले तीन महीने से बिना वेतन के हैं। स्थिति अब ऐसी हो गई है कि बिल का भुगतान न होने के कारण बिजली, टेलीफोन और इंटरनेट सेवाओं के कनेक्शन काटने के नोटिस मिल रहे हैं। कई मामलों में तो कुछ सेवाएं बंद भी हो चुकी हैं। इस प्रकार की स्थिति से देशभर के छात्रों पर भी बुरा असर पड़ेगा। शिक्षकों के वेतन मुद्दे पर दिल्ली विश्वविद्यालय में एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्य डॉ. राजेश कुमार झा ने कहा कि कॉलेज शिक्षक इन दिनों राजनीति का शिकार हो रहे हैं। दिल्ली विवि और दिल्ली सरकार के आपसी मतभेदों में शिक्षक पिस रहे हैं। उन्होंने कहा कि कि एएडी-यूटीएफ 12 कॉलेजों के वेतन मामले को कई बार सरकार के समक्ष उठा चुकी हैं। दिल्ली सरकार के 12 वित्तपोषित कॉलेजों में हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन अभी तक जारी नहीं किया गया है। डीयू के सदियों पुराने इतिहास में यह अभूतपूर्व स्थिति है, जहां पिछले तीन महीने से फैकल्टी और कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है। इनमें से कई संविदा पर कार्यरत कर्मचारी हैं, जो 15 हजार रुपये की मामूली राशि पर काम कर रहे हैं। दिल्ली जैसे महानगर और उसमें भी महामारी की चुनौती से जूझते हुए समय में उनके लिए अस्तित्व को बचाना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच इस गतिरोध की शुरुआत से ही हमने बार-बार कहा है कि फंडिंग को गर्वनिंग बॉडी(जीबी) फॉर्मेशन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। हाल ही में कुछ अखबारों में ऐसी खबरें आई थीं कि इन कॉलेजों का फंड इसलिए जारी नहीं किया गया क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छह नाम रोके गए थे। लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी के चलते फैकल्टी और स्टाफ परेशानी का शिकार क्यों हो? डॉ. राजेश कुमार झा ने कहा कि बात केवल वेतन की नहीं है, मेडिकल बिल का भुगतान भी नहीं हुआ है। कई कॉलेजों को बिजली काटने के नोटिस मिले हैं तो कुछ कॉलेजों में टेलीफोन लाइन और इंटरनेट कनेक्शन को काट भी दिया गया है क्योंकि उनके पास भुगतान के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान शैक्षिक, प्रवेश और परीक्षा कार्यों को ऑनलाइन तरीके से करना पड़ रहा है, जो कि एक अंतरिम उपाय है। इन सेवाओं के कनेक्शन काटने से देशभर के छात्रों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। डॉ. झा ने अनुरोध करते हुए कि सरकार गर्वनिंग बॉडी(जीबी) गठन के साथ वित्तपोषण को न जोड़े और अविलम्ब इन कॉलेजों का पूरा फंड जारी किया जाए, ताकि कर्मचारियों व शिक्षकों को वेतन मिल सके। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश-hindusthansamachar.in