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दिल्ली

पोंजी स्कीम में निवेश पर आकर्षक रिटर्न देने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी

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नई दिल्ली, 20 फरवरी (हि.स.)। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पोंजी स्कीम में निवेश पर आकर्षक रिटर्न देने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी करने वाली वियर्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी के निदेशक को साकेत कोर्ट के पास से गिरफ्तार किया है। आरोपित को कोर्ट ने इस मामले में भगोड़ा करार दिया था। आरोप है कि कंपनी ने 80 लोगों से आठ करोड़ की ठगी की थी। शाखा इस मामले के तीन आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। शाखा के संयुक्त आयुक्त ओपी मिश्रा ने बताया कि आरोपित की पहचान हावड़ा कोलकाता निवासी गोपाल दलपति के रूप में हुई है। प्रेम नगर निवासी गोपाल सिंह सहित अन्य पीडि़तों ने वर्ष 2017 में आर्थिक अपराध शाखा में ठगी की शिकायत की। जिसमें बताया गया कि कथित वियर्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी और वियर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉर्पोरेशन लिमिटेड कंपनी के निदेशकों ने अपनी छोटी बचत योजनाओं पर निवेश करने पर बेहतर रिटर्न देने का आश्वासन दिया और स्कीम पूरी होने पर निवेश की गई राशि को दोगुना और तिगुना देने का वादा किया गया। करीब आठ करोड़ रुपये जमा होने के बाद कंपनी के कार्यालय बंद कर फरार हो गए। जांच में पता चला कि कंपनी ने पोंजी स्कीम चलाकर लोगों से ठगी की है। कंपनी ने पीडि़तों को पैसा वापसी का आश्वासन के लिए डिबेंचर सर्टिफिकेट भी जारी किया। साथ ही पता चला कि कंपनी ने दिल्ली व कोलकाता में कार्यालय खोलकर ठगी को अंजाम दिया और पैसा जमा होने पर कार्यालयों को बंद कर दिया। जांच में यह भी पता चला कि कंपनी ने धन इक्कठा करने के लिए विभिन्न बैंक में खाते खोले। छानबीन के बाद पुलिस ने कंपनी के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक संजय कुमार दास, अमरेंद्र प्रसाद सिंह और भारत कुमार राय को गिरफ्तार कर लिया। जबकि कोर्ट में इस मामले में निदेशक गोपाल दलपति को भगोड़ा करार दिया। पुलिस गोपाल की गिरफ्तारी के लिए उसके तीन आवासों पर लगातार दबिश देती रही लेकिन वह नहीं मिला। बावजूद पुलिस उसपर निगरानी बनाए रखा। 18 फरवरी को गोपाल के साकेत कोर्ट पहुंचने की जानकारी मिली, जहां से पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि गोपाल दसवीं पास है। इस आरोपित कंपनी में जुडऩे से पहले गोपाल इंश्योरेंस एजेंट का काम करता था। पूछताछ में गोपाल ने बताया कि कंपनी के सह प्रबंध निदेशक संजय दास और अमरेंद्र ने उससे कहा था कि इस कंपनी में उसे मेहनत नहीं करना पड़ेगा, सिर्फ निदेशक बनकर निवेशकों को जारी डिबेंचर प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर करना होगा। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। हिन्दुस्थान समाचार/अश्वनी