दिल्ली सरकार के कैबिनेट के निर्णय को उप-राज्यपाल ने किया खारिज, दिल्ली पुलिस के पैनल को लागू करने के दिए आदेश
दिल्ली सरकार के कैबिनेट के निर्णय को उप-राज्यपाल ने किया खारिज, दिल्ली पुलिस के पैनल को लागू करने के दिए आदेश
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दिल्ली सरकार के कैबिनेट के निर्णय को उप-राज्यपाल ने किया खारिज, दिल्ली पुलिस के पैनल को लागू करने के दिए आदेश

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नई दिल्ली, 30 जुलाई (हि.स.)। दिल्ली दंगों के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में वकीलों का पैनल नियुक्त करने को लेकर दिल्ली कैबिनेट के निर्णय को उप-राज्यपाल अनिल बैजल ने खारिज कर दिया है। साथ ही गृह विभाग को आदेश दिया है कि दिल्ली पुलिस के पैनल को मंजूरी दें। अब संविधान के तहत उप-राज्यपाल का यह आदेश दिल्ली सरकार पर बाध्य होगा और दिल्ली सरकार को यह आदेश हर हाल में लागू करना होगा। दिल्ली दंगों के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में वकीलों का पैनल नियुक्त करने को लेकर मंगलवार को दिल्ली सरकार की कैबिनेट की बैठक हुई थी। जिसमें दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस के वकीलों के पैनल को खारिज कर दिया था। दिल्ली कैबिनेट का मानना था कि दिल्ली दंगों के संबंध में पुलिस की जांच को कोर्ट ने निष्पक्ष नहीं माना है। ऐसे में दिल्ली पुलिस के पैनल को मंजूरी देने से केस की निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है। उप-राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 239(एए)(4) के तहत मिले अधिकार का इस्तेमाल कर दिल्ली सरकार के कैबिनेट के निर्णय को खारिज कर दिया। साथ ही इस अनुच्छेद से मिले अधिकार के तहत दिल्ली सरकार को अंतरिम आदेश जारी किया है कि दिल्ली पुलिस के पैनल को मंजूरी दी जाए। कैबिनेट की बैठक में दिल्ली पुलिस के प्रस्ताव के साथ दिल्ली सरकार और उप-राज्यपाल के सुझाव पर विचार किया गया था। इस दौरान यह तय हुआ था कि दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा पैदा करने के लिए जो भी दोषी हैं, उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए। साथ ही यह भी तय हुआ था कि निर्दोष को परेशान या दंडित नहीं किया जाना चाहिए। इस कारण कैबिनेट ने दिल्ली सरकार के वकीलों के पैनल की नियुक्ति पर सहमति जताई थी। साथ ही दिल्ली पुलिस के वकील पैनल को मंजूरी देने के उप-राज्यपाल के सुझाव को अस्वीकार कर दिया था। इसके पीछे का कारण यह था कि दिल्ली पुलिस की जांच पर विभिन्न न्यायालय की ओर से पिछले दिनों उंगली उठाई गई है। दिल्ली कैबिनेट का मानना था कि क्रिमिनल जस्टिस का मूल सिद्धांत है कि जांच पूरी तरह से अभियोजन से स्वतंत्र होनी चाहिए। दिल्ली पुलिस दिल्ली दंगों की जांच एजेंसी रही है, ऐसे में उनके वकीलों के पैनल को मंजूरी देने से निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसी को वकीलों को तय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वकीलों को जांच एजेंसी से स्वतंत्र होना चाहिए। पूरे देश और दुनिया में यह सिद्धांत सबसे अहम माना जाता है और इसका उल्लंघन दिल्ली में नहीं होने देना चाहिए। हिन्दुस्थान समाचार /प्रतीक खरे-hindusthansamachar.in